अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तेहरान पहुँचे पाकिस्तान के आर्मी चीफ, जानिए क्या है पूरा मामला.

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने के लिए अब कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गईं हैं। इसी कड़ी में 24 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने देश के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई फोन पर बातचीत के बाद सामने आया है, जिसमें अमेरिका ने पाकिस्तान से अपील की थी कि वह अपनी कूटनीतिक पकड़ का इस्तेमाल करके ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने में मदद करे।
तेहरान में नए प्रस्तावों पर हुई चर्चा
तेहरान पहुँचने के बाद पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख ने ईरान के आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रुकी हुई सीधी बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बातचीत के मुख्य मुद्दों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और कूटनीतिक संवाद को दोबारा शुरू करना शामिल था। यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में हो रही है जब 17 जून 2026 को साइन किए गए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की 60 दिनों की समय सीमा पिछले हफ्ते ही बिना किसी बड़े समझौते के खत्म हो चुकी है। हालांकि इस डेडलाइन के खत्म होने के बावजूद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने यह साफ किया है कि यह समझौता अभी भी इस विवाद को खत्म करने का सबसे बेहतरीन रास्ता है।
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव और प्रतिबंधों की चेतावनी
दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को कई कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान करने की बात कही है, जिसे उन्होंने अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला बताया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 23 अगस्त को कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों का यह दौरा दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को और मजबूत करने का काम करता है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के मोहसेन रेजाई ने कड़ी चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका के इन कदमों का साथ देगा, उसे युद्ध में शामिल माना जाएगा। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि यह आर्थिक दबाव ऐसे ही जारी रहा तो वह खाड़ी देशों से होने वाले सभी तेल निर्यात को पूरी तरह से बंद कर देगा, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले जहाजों के आने-जाने पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
शांति स्थापना के लिए अन्य देशों की भूमिका
पाकिस्तानी सरकारी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि आर्मी चीफ आसिम मुनीर इस गतिरोध को खत्म करने के लिए लगातार वाशिंगटन और तेहरान के संपर्क में बने हुए हैं। हालांकि इस शांति प्रक्रिया में कतर, ओमान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे देश भी लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान का यह मानना है कि इस क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए यह व्यक्तिगत दौरा बहुत जरूरी था। इस तनाव का असर उन तमाम विदेशी नागरिकों और कामगारों पर भी पड़ सकता है जो रोजगार के सिलसिले में गल्फ देशों में रहते हैं या इस रास्ते से सफर करते हैं।