PoJK में जारी प्रदर्शन पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का विवादित बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया अपना दुश्मन

Sushma Kumari4 August 20262 min read59 viewsWorld
PoJK में जारी प्रदर्शन पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का विवादित बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया अपना दुश्मन

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर यानी PoJK में पिछले कुछ समय से हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। वहां की जनता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी हुई है और लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक बयान सामने आया है, जिसने पूरे मामले में नई आग लगा दी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन बताया है, जिसके बाद से वहां का राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है।

प्रदर्शनकारियों पर सख्त रुख के संकेत

सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ख्वाजा आसिफ को प्रदर्शनकारियों को देश का दुश्मन बताते हुए सुना जा सकता है। रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब PoJK के कई हिस्सों में लोग बिजली की बढ़ी हुई कीमतों और गेहूं के दाम को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। जानकारों का कहना है कि सरकार का यह रवैया संकेत देता है कि आने वाले दिनों में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती और बढ़ सकती है और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल और अधिक किया जा सकता है।

हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई

'द डिप्लोमैट' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, PoJK के रावलाकोट जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। इंटरनेट पर कई ऐसे वीडियो भी घूम रहे हैं जिनमें सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग किए जाने का दावा किया गया है, हालांकि इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। रिपोर्टों के मुताबिक, 27 जुलाई को जब लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च कर रहे थे, तब सुरक्षा बलों के साथ हुई कार्रवाई में कम से कम 21 लोगों की जान जाने की बात कही जा रही है। इस दौरान वहां इंटरनेट और संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया था, जिससे सही जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया था।

क्यों हो रहे हैं ये प्रदर्शन

इस पूरे आंदोलन की कमान जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के हाथों में है, जिसका गठन 2023 में किया गया था। शुरू में लोगों ने सिर्फ बिजली के बिलों और खाने-पीने की चीजों के दाम कम करने की मांग की थी। लेकिन अब यह मामला शासन व्यवस्था और चुनाव सुधारों तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि विधानसभा में जो सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, उन्हें खत्म किया जाए। अभी यह प्रदर्शन सिर्फ रावलाकोट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे बड़े इलाकों में भी फैल चुके हैं। यदि सरकार ने समय रहते कोई समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में यह स्थिति और भी उलझ सकती है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिक जानकारी के लिए आप The Diplomat की विस्तृत रिपोर्ट देख सकते हैं।

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