इजराइल पर पाक रक्षा मंत्री की टिप्पणी से विवाद, द टाइम्स ऑफ इजराइल ने बयान को बताया भड़काऊ.

तेल अवीव में 12 अगस्त को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की इजराइल को लेकर दी गई हालिया टिप्पणी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द टाइम्स ऑफ इजराइल की एक रिपोर्ट में उनके इस बयान को बेहद भड़काऊ, नरसंहार की धमकी देने वाला और पूरी तरह से लापरवाह करार दिया गया है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वैश्विक राजनीति में एक बार फिर से तनाव का माहौल बनता हुआ नजर आ रहा है और विभिन्न स्तरों पर इसकी आलोचना की जा रही है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का विवादित बयान और मुस्लिम देशों से अपील
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सार्वजनिक रूप से इजराइल को एक अवैध राज्य करार दिया था। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा था कि इजराइल पूरे मुस्लिम जगत के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने तमाम मुस्लिम देशों से यह अपील की थी कि वे आपसी मतभेद भुलाकर इजराइल के खिलाफ एकजुट हो जाएं और एक साझा सैन्य मोर्चा तैयार करें। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके बाद से भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
परमाणु हथियार संपन्न देश के मंत्री की अपील को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि ख्वाजा आसिफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के पद पर हैं और उनका देश एक परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र है। ऐसी स्थिति में एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इजराइल के खिलाफ सैन्य गठबंधन बनाने की खुली अपील को महज एक सामान्य राजनीतिक बयान कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि उनकी यह टिप्पणी केवल इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों, गाजा युद्ध या वहां की बस्तियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने सीधे तौर पर इजराइल के अस्तित्व की वैधता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
लाखों यहूदियों के जीवन पर मंडराता खतरा
विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यह तर्क भी दिया गया है कि यदि इजराइल को सैन्य ताकत के बल पर खत्म करने की कोई भी कोशिश की जाती है, तो उसका सीधा और भयानक असर वहां रहने वाले लाखों मासूम यहूदियों पर पड़ेगा। इस तरह की किसी भी आक्रामक कार्रवाई से बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन, भयंकर दमन और भारी संख्या में जनहानि होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी मांग की गई है कि मुस्लिम देशों की सरकारों और प्रमुख नेताओं को आगे आकर इस तरह के बयानों की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए ताकि क्षेत्रीय शांति को बचाया जा सके।
सऊदी अरब और तुर्किये के नए रक्षा समझौते पर सवाल
इस पूरी स्थिति के बीच रिपोर्ट में सऊदी अरब और तुर्किये से यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि उनका नया रक्षा समझौता किसी भी सूरत में इजराइल के खिलाफ किसी आक्रामक कार्रवाई के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। चूंकि तुर्किये एक महत्वपूर्ण NATO सदस्य देश है, इसलिए रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसके पश्चिमी सहयोगियों को भी आगे आकर इस समझौते की वास्तविक प्रकृति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों और वैश्विक मंच पर सुरक्षा चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।