POJK Protest: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का विवादित बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया भारत की तरह दुश्मन.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री خواजा आसिफ के एक ताज़ा बयान ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर यानी POJK में मचे घमासान और विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्री महोदय द्वारा प्रदर्शनकारियों की तुलना सीधे तौर पर भारत से करते हुए उन्हें देश का दुश्मन करार दिया गया है, जिसे वहां चल रहे जनआंदोलन के प्रति सरकार के बेहद सख्त और आक्रामक रवैये के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें ख्वाजा आसिफ कथित तौर पर यह कहते हुए साफ सुने जा सकते हैं कि वह इन स्थानीय प्रदर्शनकारियों को भी भारत की तरह ही अपना दुश्मन मानते हैं। यह बयान ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है जब पीओजेके के कई इलाकों में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और आम जनता तथा सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है.
कड़े रुख के संकेत और सुरक्षा बलों की कार्रवाई
प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन 'द डिप्लोमैट' में छपे एक विस्तृत विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तानी सरकार की तरफ से आने वाली इस तरह की तीखी टिप्पणियां इस बात का साफ संकेत देती हैं कि सरकार इस आंदोलन को कुचलने के लिए और भी ज्यादा सख्ती और बल का प्रयोग कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के दौरान पीओजेके के रावलाकोट समेत कई प्रमुख इलाकों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के आमने-सामने आने तथा हिंसक झड़पों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो भी खूब प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें वहां तैनात सुरक्षा बलों द्वारा आम जनता पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने का दावा किया जा रहा है, हालांकि स्थानीय स्तर पर इन तमाम वीडियो की किसी भी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की जा सकी है। जमीनी हालात इतने ज्यादा बिगड़े हुए हैं कि आम आदमी का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो गया है और डर का माहौल बना हुआ है.
सामने आए गंभीर आरोप और इंटरनेट पाबंदियां
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 27 जुलाई को रावलाकोट से मुज़फ़्फ़राबाद की तरफ शांति मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने जब कार्रवाई की, तो उस दौरान कम से कम 21 लोगों की मौत होने और कई अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का बड़ा दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की भी किसी भी स्वतंत्र स्रोत से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। रिपोर्ट में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि उस तनावपूर्ण अवधि के दौरान प्रशासन द्वारा संचार सेवाओं और इंटरनेट पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे, जिसकी वजह से जमीन पर क्या हो रहा है इसकी सटीक और स्वतंत्र जानकारी बाहर आ पाना बेहद कठिन साबित हुआ। इस पूरे जनआंदोलन की अगुवाई मुख्य रूप से जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC कर रही है, जिसका गठन साल 2023 में किया गया था. शुरुआत के दिनों में इस संगठन ने केवल महंगी बिजली के बिल और गेहूं की लगातार बढ़ती कीमतों जैसे आम जनजीवन से जुड़े मुद्दे उठाए थे, लेकिन समय के साथ इसने स्थानीय शासन व्यवस्था और चुनावी सुधारों की मांग भी पूरी ताकत से उठानी शुरू कर दी, जिसमें विधानसभा के भीतर शरणार्थियों के वास्ते आरक्षित सीटों की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग सबसे प्रमुख है.
बढ़ता दायरा और अनिश्चित राजनीतिक भविष्य
विश्लेषण में यह दावा भी पूरी प्रमुखता से किया गया है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर इन विरोध प्रदर्शनों का दायरा केवल रावलाकोट तक सीमित न रहकर काफी आगे निकल चुका है और अब यह मुज़फ़्फ़राबाद, मीरपुर तथा अन्य कई इलाकों तक पूरी तरह से फैल चुका है। जानकारों का मानना है कि यदि यह जनआंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप लेता है, तो वहां की राजनीतिक स्थिति बेहद जटिल और संभाल से बाहर हो सकती है, जिसका असर दूरगामी होगा। वहीं दूसरी तरफ, इन तमाम गंभीर दावों और बयानों पर अभी तक पाकिस्तान सरकार या किसी भी जिम्मेदार प्राधिकारी की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में असमंजस और गुस्सा दोनों लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिक अपनी बुनियादी और रोजमर्रा की मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, जबकि हुक्मरानों के बयानों से हालात सुधरने के बजाय और अधिक बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं.