Pakistan: इमरान खान को जेल में रखने के लिए सरकार का नया दांव, सुप्रीम कोर्ट में की पुनर्विचार याचिका दायर.

पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर से बड़ा मोड़ आ गया है। देश के अपदस्थ प्रधानमंत्री Imran Khan को राजधानी इस्लामाबाद के Shifa International Hospital भेजने के उच्चतम न्यायालय के फैसले से संघीय सरकार बुरी तरह बौखला गई है। सरकार ने इस ऐतिहासिक फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है और अदालत से अपने पुराने आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले साल यानी 5 अगस्त 2023 से रावलपिंडी की Adiala Jail में बंद हैं और उनके समर्थक लगातार उनकी रिहाई और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि देश की शीर्ष अदालत सरकार की इस नई याचिका पर क्या रुख अपनाती है।
संघीय सरकार ने अदालत के फैसले को बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर
द न्यूज अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, संघीय सरकार के मुख्य आयुक्त की ओर से इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल Naved Hayat Malik ने यह पुनर्विचार याचिका अदालत में दाखिल की है। सरकार की तरफ से दाखिल इस याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय का 18 अगस्त का अंतरिम आदेश पूरी तरह से भेदभावपूर्ण था। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि अदालत का यह फैसला उसके अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला था और इस पर दोबारा विचार किया जाना बेहद जरूरी है। सरकार का कहना है कि अगर माननीय अदालत ने कानून के संबंधित प्रावधानों पर पहले ही ध्यान दे दिया होता, तो इस तरह का आदेश पारित ही नहीं किया जा सकता था। इसलिए कानूनी कमियों को देखते हुए इस आदेश को बदला जाना चाहिए।
अस्पताल भेजने के नियमों का दिया गया हवाला
अपनी इस नई याचिका में संघीय सरकार ने पाकिस्तान जेल नियम 1978 (197) का हवाला देते हुए अपनी बात रखी है। सरकार का तर्क है कि किसी भी कैदी को जेल से सीधे अस्पताल भेजने के लिए सरकार की औपचारिक मंजूरी और जेल महानिरीक्षक यानी आईजी के जरिए ही कार्रवाई पूरी होने की जरूरत होती है। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले कैदी को हर वक्त कड़ी पुलिस निगरानी में रहना अनिवार्य होता है। याचिका में यह भी याद दिलाया गया कि बीते 5 अगस्त 2023 को एक एडिशनल सेशन जज ने इमरान खान को भ्रष्टाचार के मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में सजा के खिलाफ अपील की थी। उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की मांग की थी, जिसे उच्च न्यायालय ने गत 12 मार्च को साफ तौर पर खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा था।
उच्चतम न्यायालय का क्या था कड़ा निर्देश
बीते मंगलवार यानी 18 अगस्त को ही देश के उच्चतम न्यायालय ने पीटीआई प्रमुख इमरान खान को महज 2 दिन के भीतर शिफा अस्पताल में भर्ती कराने और आगामी 16 सितंबर तक वहीं रखकर उनका मुकम्मल इलाज कराने का सख्त निर्देश दिया था। अदालत ने उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए एक विशेष चिकित्सा बोर्ड गठित करने को भी कहा था। इसके साथ ही अदालत ने यह भी अनुमति दी थी कि इलाज के दौरान इमरान खान की बहन और उनके निजी चिकित्सक डॉ. उजमा समेत अन्य डॉक्टर वहां मौजूद रह सकते हैं, हालांकि इस पूरी चिकित्सा प्रक्रिया का सारा खर्च उनका परिवार ही उठाएगा। अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि अस्पताल में रहने के दौरान 73 वर्षीय इमरान खान को सप्ताह में केवल एक बार अपने परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति दी जाएगी। अदालत की तरफ से यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि प्रशासन ने इन निर्देशों का कोई भी उल्लंघन किया, तो पीटीआई संस्थापक को मिलने वाली अन्य सभी सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी।