Saudi Arabia Defence Pact: मक्का डिफेंस समझौते पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बड़ा बयान, कहा किसी देश के खिलाफ नहीं है यह पैक्ट

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हाल ही में साइन किए गए मक्का डिफेंस समझौते को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने संघीय कैबिनेट की बैठक में साफ तौर पर कहा कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसका मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता दिखाना नहीं है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच यह समझौता 7 अगस्त 2026 को मक्का में साइन किया गया था। इस नए समझौते के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिसके बाद सरकार की ओर से यह सफाई सामने आई है।
समझौते का मुख्य उद्देश्य और क्षेत्रीय शांति
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस trilateral defence pact का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देना है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भी इस बात को दोहराया कि यह समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है। उन्होंने बताया कि यह समझौता संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के अनुरूप है, जो व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा का अधिकार देता है। इस समझौते के नियमों के मुताबिक, अगर किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी साइन करने वाले देशों पर हमला माना जाएगा, जिससे सामूहिक रोक का दायरा मजबूत हो सके। इस बारे में अधिक जानकारी Ministry of Foreign Affairs Pakistan की प्रेस रिलीज में दी गई है।
पुराने समझौतों का विस्तार और वैश्विक प्रतिक्रिया
यह मक्का संयुक्त रक्षा समझौता सितंबर 2025 के पाकिस्तान और सऊदी अरब के पुराने रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते का ही एक बड़ा रूप है, जिसमें अब तुर्किए को भी शामिल कर लिया गया है ताकि इन तीनों सुन्नी ताकतों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा किया जा सके। इस्लामिक देशों के संगठन Organisation of Islamic Cooperation (OIC) ने इस समझौते की तारीफ करते हुए इसे एक अहम रणनीतिक कदम बताया है। इसके अलावा, कुवैत, बहरीन और सोमालिया जैसे देशों ने भी इसका स्वागत किया है, जबकि ईरान की तरफ से भी इस पर एक सकारात्मक रुख देखने को मिला है। इस संबंध में अन्य अंतरराष्ट्रीय अपडेट United News of India की रिपोर्ट में पढ़े जा सकते हैं।
हालांकि आधिकारिक बयानों में इसे पूरी तरह से रक्षात्मक बताया गया है, लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif के पहले के बयानों में इजराइल के खिलाफ एक साझा मुस्लिम मोर्चे की बात कही गई थी। तुर्किए के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने इस दायरे को सीमित करने की कोशिश की और यह स्पष्ट किया कि इस समझौते में किसी भी आम दुश्मन का जिक्र नहीं किया गया है। समझौते पर साइन होने के तुरंत बाद ही सऊदी अरब की एक आरामको फैसिलिटी पर हौथी ड्रोन हमले की खबर आई, जिससे इस नए सुरक्षा समझौते के सामने शुरुआती चुनौतियां भी खड़ी होती दिख रही हैं।