Pakistan में बड़ा छापा, सैकड़ों विदेशी नागरिक हुए गिरफ्तार, फर्जी कॉल सेंटर चलाकर कर रहे थे ठगी.

Praggya Singh sabal17 August 20262 min read51 viewsExpat Issues
Pakistan में बड़ा छापा, सैकड़ों विदेशी नागरिक हुए गिरफ्तार, फर्जी कॉल सेंटर चलाकर कर रहे थे ठगी.

पाकिस्तान की कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने इस्लामाबाद में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इस गैरकानूनी धंधे में शामिल कम से कम 372 विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। इस पूरी कार्रवाई को फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA और नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NCCIA ने मिलकर अंजाम दिया है। अधिकारियों के मुताबिक ये लोग टूरिस्ट वीजा पर पाकिस्तान आए थे लेकिन अंदर ही अंदर खतरनाक साइबर फ्रॉड और गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

इस्लामाबाद के प्लाजा में चल रहा था बड़ा खेल

यह पूरा मामला इस्लामाबाद के गुलबर्ग ग्रीन्स इलाके में बने स्पारको प्लाजा का है जहां एक बड़े पैमाने पर फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। रेड के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ये लोग निवेश के नाम पर लोगों के साथ बड़ा धोखा कर रहे थे। इसके अलावा आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट बनाने का काम भी यहीं से किया जा रहा था। पकड़े गए आरोपियों में चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के नागरिक शामिल हैं। ये सभी लोग बेहद चालाकी से सोशल मीडिया पर महिलाओं के फर्जी प्रोफाइल बनाकर भोले-भाले लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर उन्हें नकली योजनाओं में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर ठगते थे।

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जेल में बदले गए प्लाजा और कोर्ट का एक्शन

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उस पूरे प्लाजा को ही एक उप-जेल यानी सब-जेल घोषित कर दिया है ताकि पकड़े गए इतने सारे लोगों को एक साथ संभाल जा सके। स्थानीय अदालत ने इन सैकड़ों आरोपियों को आगे की जांच के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत का यह फैसला वीजा नियमों के उल्लंघन और साइबर अपराध के मामलों में लिया गया है। FIA और NCCIA के अधिकारी इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं और पकड़े गए लोगों के देशों के दूतावासों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके।

डिपोर्टेशन की तैयारी और इंटरनेशनल गैंग का पर्दाफाश

राजधानी के बाहरी इलाकों में चल रहे इस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। जांच एजेंसियों की प्राथमिक सूची में इन सभी आरोपियों को डिपोर्ट करना यानी उनके देश वापस भेजना सबसे ऊपर चल रहा है। इस तरह के मामलों से प्रवासियों और विदेश में काम करने वाले लोगों की साख पर भी असर पड़ता है। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस नेटवर्क के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और इस अवैध धंधे में और कौन-कौन लोग अंदरूनी तौर पर शामिल थे। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है क्योंकि जांच एजेंसियां बेहद तेजी से काम कर रही हैं।

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