Pakistan News: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मीडिया पर बड़ा शिकंजा, पत्रकारों की गिरफ्तारी और इंटरनेट बंदी पर वैश्विक संगठन ने जताई गहरी चिंता.

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में इन दिनों हालात काफी तनावपूर्ण चल रहे हैं। वहां लगातार बढ़ रही अशांति और विरोध प्रदर्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने पत्रकारों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से साफ तौर पर मांग की है कि हिरासत में लिए गए सभी पत्रकारों को तुरंत रिहा किया जाए और मीडिया पर लगाए गए तमाम तरह के कड़े प्रतिबंधों को बिना किसी देरी के समाप्त किया जाए।
पीओके में कैसे बढ़ रहा है सूचना का संकट
आरएसएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीओके के अंदर हालात बहुत खराब होते जा रहे हैं। वहां लगातार इंटरनेट बंद रखा जा रहा है, जिससे आम जनता और मीडिया दोनों का संपर्क कट गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा की वेबसाइट को भी पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है। क्षेत्र में पत्रकारों की लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं, विदेशी पत्रकारों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और अदालतों की तरफ से लगातार समन भेजे जा रहे हैं। इन तमाम घटनाओं की वजह से वहां की प्रेस की स्वतंत्रता पूरी तरह खतरे में पड़ गई है और सच्चाई बाहर नहीं आ पा रही है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब पीओके में चुनावी सुधारों की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों को पाकिस्तानी अधिकारियों ने पूरी ताकत के साथ बलपूर्वक दबाने की कोशिश की और बड़ी संख्या में आम लोगों व प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। इसी दौरान क्षेत्र में हो रही मीडिया कवरेज को रोकने के लिए नए और सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए गए। आपको बता दें कि इस तथाकथित विधानसभा के चुनाव 27 जुलाई को संपन्न हुए थे, जिसके बाद से ही वहां असंतोष और ज्यादा बढ़ गया है।
आरएसएफ के अधिकारियों ने क्या कहा
आरएसएफ के दक्षिण एशिया डेस्क की प्रमुख सेलिया मर्सिए ने इस मामले पर खुलकर बात रखी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने इस पूरे क्षेत्र में प्रभावी रूप से सूचना का एक बड़ा अंधकार पैदा कर दिया है ताकि सच बाहर न आ सके। उन्होंने इंटरनेट बंद करने, पत्रकारों को पकड़कर जेल में डालने और उनके घूमने पर पाबंदी लगाने को प्रेस की स्वतंत्रता में बहुत बड़ी गिरावट करार दिया है। संगठन ने अपनी मांग में साफ कहा है कि हिरासत में बंद पत्रकारों की तुरंत रिहाई हो, इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बहाल की जाएं, विदेशी मीडिया के लिए बनाए गए नए नियमों को हटाया जाए और पत्रकारों के खिलाफ गलत तरीके से हो रही कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
नए दिशा-निर्देश और कानूनों का हो रहा है गलत इस्तेमाल
संगठन ने जानकारी दी कि पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 02 अगस्त को अल जजीरा की वेबसाइट को ब्लॉक करने का काम किया था। इसके ठीक दो दिन बाद मंत्रालय ने ‘फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026’ नाम से नए नियम जारी किए। इन नए नियमों के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर जाकर रिपोर्टिंग करने वाले विदेशी संवाददाताओं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों के वास्ते अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
आरएसएफ ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इन नए दिशानिर्देशों के बहाने पाकिस्तान की विचारधारा, संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ काम करने जैसे अस्पष्ट और मनगढ़ंत आधार बनाकर किसी भी पत्रकार की मान्यता को कभी भी रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा संगठन ने पाकिस्तान के कड़े पेका (PECA) कानून के दुरुपयोग पर भी गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, 29 जुलाई को नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने स्वतंत्र पत्रकार असद अली तूर को कथित रूप से झूठी सूचना फैलाने के आरोप में पेका कानून की धारा 26ए के तहत आधिकारिक तौर पर समन भेजा था।