Pakistan-Saudi Defense Deal: पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते में मिस्र की हो सकती है एंट्री, तुर्किये ने दिया बड़ा संकेत

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया समीकरण बनता हुआ नजर आ रहा है, जहां खाड़ी देशों और क्षेत्रीय ताकतों के बीच आपसी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। तुर्किये ने एक बड़ा संकेत देते हुए बताया है कि हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और उसके बीच हुए रक्षा समझौते में मिस्र भी शामिल हो सकता है। इस संभावित बदलाव से पश्चिम एशिया और आसपास के इलाकों में सुरक्षा का एक नया दायरा तैयार हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मिस्र की भागीदारी पर तुर्किये का बड़ा बयान
तुर्किये के उपराष्ट्रपति जेवदेत यिलमाज़ ने शनिवार को सीएनएन तुर्क को दिए एक इंटरव्यू में यह बात साफ की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस त्रिपक्षीय समझौते का विस्तार किया जाना पूरी तरह से संभव है। उनके मुताबिक, मिस्र एक बहुत ही मजबूत देश है और इस तरह के सुरक्षा ढांचे में उसकी भागीदारी इस पूरे गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने मिलकर शुक्रवार को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
समझौते की मुख्य बातें और क्षेत्रीय ताकतें
तुर्किये के एक स्थानीय अखबार के अनुसार, इस नए रक्षा समझौते के तहत तीनों देश आपस में खुफिया जानकारी साझा करेंगे और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर आपसी तालमेल बढ़ाएंगे। पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ यूसुफ एनर ने बताया कि इन तीनों देशों की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं। तुर्किये के पास आधुनिक रक्षा उद्योग और मजबूत सैन्य क्षमता है, सऊदी अरब के पास अपार वित्तीय और ऊर्जा संसाधन हैं, जबकि पाकिस्तान के पास विशाल सशस्त्र सेनाएं और परमाणु क्षमता मौजूद है।
नाटो जैसा सुरक्षा प्रावधान और नया सुरक्षा चाप
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस त्रिपक्षीय समझौते को पूरी तरह से संस्थागत रूप दे दिया जाता है, तो इसमें अन्य क्षेत्रीय देशों के शामिल होने के रास्ते खुल जाएंगे। इस स्थिति में अनातोलिया से लेकर लाल सागर, फारस की खाड़ी और हिंद महासागर तक एक नया सुरक्षा चाप उभरकर सामने आएगा। इस समझौते में सबसे बड़ा प्रावधान यह रखा गया है कि यदि तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा। यह व्यवस्था ठीक वैसी ही है जैसी पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन नाटो में अपने सदस्य देशों को सुरक्षा की गारंटी देने के लिए लागू होती है।