कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के बयान से भड़का पाकिस्तान, इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को किया तलब.

Praggya Singh sabal20 August 20263 min read83 viewsWorld
कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के बयान से भड़का पाकिस्तान, इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को किया तलब.

बुधवार, 19 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में तैनात शीर्ष अमेरिकी राजनयिक और चार्ज डी अफेयर्स नेटली बेकर को तलब किया। पाकिस्तान ने यह कदम भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद उठाया जिसमें उन्होंने कश्मीर को लेकर टिप्पणी की थी। इस कड़े कूटनीतिक विरोध के जरिए पाकिस्तान ने अपनी नाराजगी साफ तौर पर सामने रखी और राजदूत के बयानों को लेकर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।

कश्मीरी दौरे पर दिए गए बयान से मचा बवाल

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अपनी पहली यात्रा के दौरान भारतीय प्रशासित कश्मीर का दौरा किया था। श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद उन्होंने इस क्षेत्र को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। अपनी इस यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत ने यह भी संकेत दिया था कि क्षेत्रीय सुरक्षा में सुधार को देखते हुए अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी ट्रेवल एडवाइजरी पर फिर से विचार कर सकता है। उनके इस दौरे और बयानों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल को काफी तेज कर दिया है।

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पाकिस्तान ने बयान को बताया तथ्यात्मक रूप से गलत

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजदूत के इन बयानों की कड़ी निंदा की और उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया। पाकिस्तान ने अपनी पुरानी और स्पष्ट स्थिति को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादित क्षेत्र है। देश का मानना है कि इस क्षेत्र की अंतिम स्थिति का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और वहां के लोगों की इच्छाओं के अनुसार ही होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय नियमों और अमेरिका की नीति का हवाला

पाकिस्तान की तरफ से इस बयान को एक गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताया गया जो कश्मीर विवाद पर अमेरिका की आधिकारिक और पुरानी नीति के खिलाफ है। इस्लामाबाद ने यह भी कहा कि यह बयान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धताओं के विपरीत है। पाकिस्तान ने अमेरिका से आग्रह किया कि भविष्य में दिए जाने वाले सार्वजनिक बयान क्षेत्र की विवादित स्थिति के अनुकूल होने चाहिए। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस पुराने प्रस्ताव की भी याद दिलाई जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की थी।

विश्लेषकों की राय और पूर्व राजनयिक की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव और इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ क्षेत्रीय अध्ययन के अध्यक्ष जौहर सलीम ने इस मामले पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत के बयानों को सीधे तौर पर अमेरिका की नीति में आधिकारिक बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार अमेरिकी रुख में किसी भी तरह के बुनियादी बदलाव की घोषणा सीधे वाशिंगटन या अमेरिकी विदेश विभाग के माध्यम से की जाती है। उन्होंने राजदूत की टिप्पणियों को एक संभावित कूटनीतिक भूल बताया, हालांकि इस घटना ने वाशिंगटन और इस क्षेत्र के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के लहजे में एक नया मोड़ ला दिया है।

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