पाकिस्तान ने स्वीकार किया सऊदी अरब और तुर्की का आमंत्रण, इस महीने इस्तांबुल में होगी बड़ी बैठक

Praggya Singh sabal19 August 20262 min read82 viewsSaudi
पाकिस्तान ने स्वीकार किया सऊदी अरब और तुर्की का आमंत्रण, इस महीने इस्तांबुल में होगी बड़ी बैठक

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की है कि उनका देश इस महीने के आखिर में इस्तांबुल में होने वाली उच्च स्तरीय 'रीजनल 4' विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेगा। इस बैठक में पाकिस्तान के साथ-साथ सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह आमंत्रण तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान द्वारा पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार को एक टेलीफोन पर बातचीत के दौरान दिया गया था, जिसे पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

यह आगामी शिखर सम्मेलन क्षेत्र में चल रही कई कूटनीतिक बैठकों की श्रृंखला का ही एक हिस्सा है। इससे पहले 14 अगस्त 2026 को मिस्र के एल अमीन में मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की एक त्रिपक्षीय बैठक हुई थी। इस 'आर-4' समूह ने इससे पहले 21 जून 2026 को काहिरा में, 5 अगस्त 2026 को अम्मान में और 19 मार्च 2026 को रियाद में समन्वय सत्र आयोजित किए थे। इन सभी बैठकों के बारे में विस्तार से जानने के लिए तुर्की विदेश मंत्रालय के साझा बयान को देखा जा सकता है।

क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर जोर

इन ministerial बैठकों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना और अमेरिका तथा इजराइल के साथ ईरान के चल रहे संघर्ष के बीच तनाव को कम करने के प्रयास करना है। आपको बता दें कि यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इन कूटनीतिक प्रयासों में अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून 2026 को हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' का कार्यान्वयन भी शामिल है। इसके अलावा, यह बैठक 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की द्वारा हस्ताक्षरित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तुरंत बाद हो रही है। यह एक आपसी रक्षा समझौता है जिसे भविष्य में मिस्र को शामिल करने के लिए भी खुला रखा गया है, जिसकी पुष्टि सऊदी प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट में की गई है। पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान सभी मंत्रियों ने गाजा और अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र में सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है और हमेशा दो-राज्य समाधान के समर्थन पर जोर दिया है।

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