भारत में 56 साल बाद पाकिस्तानियों को मिली नागरिकता, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बांटे गए प्रमाण पत्र।

Aanya17 August 20263 min read88 viewsIndia
भारत में 56 साल बाद पाकिस्तानियों को मिली नागरिकता, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बांटे गए प्रमाण पत्र।

भारत में पाकिस्तान से आए विस्थापितों को लेकर एक बहुत बड़ा और चौकाने वाला कदम उठाया गया है जिसके बारे में शायद ही किसी ने पहले कभी सोचा होगा। आज के दौर में किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को हिंदुस्तान में बसाना या फिर उन्हें कानूनी तौर पर नागरिकता देना बहुत बड़ी बात मानी जाती है। लेकिन पिछले दिनों यह कल्पना पूरी तरह से हकीकत में बदल गई जब भारत सरकार और राज्य प्रशासन ने मिलकर 56 साल पहले पाकिस्तान से आए हजारों विस्थापितों को आधिकारिक रूप से देश की नागरिकता सौंप दी। यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के तराई वाले इलाके से जुड़ा है जहां सरकार ने एक विशेष कार्यक्रम के जरिए इन सभी परिवारों को उनके अधिकार दिए हैं।

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में हुआ बड़ा कार्यक्रम

सरकार की तरफ से यह बड़ा फैसला और विस्थापितों को नागरिकता देने का मुख्य कार्यक्रम देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में आयोजित किया गया। पीलीभीत जिला नेपाल की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है जिसे लोग बांसुरी निर्माण और अपने प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा टाइगर रिजर्व के लिए भी बहुत अच्छी तरह जानते हैं। इस इलाके को कई लोग मिनी पंजाब के नाम से भी पुकारते हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश बन चुका है, वहां से प्रताड़ित होकर कुछ परिवार वर्ष 1959 से 1971 के बीच भारत आए थे। शुरुआत में इन लोगों को देश के कई राज्यों में भटकना पड़ा और कोई स्थायी ठिकाना नहीं मिला, लेकिन बाद में इन्हें उत्तर प्रदेश का यह तराई क्षेत्र रहने और खेती करने के लिए सबसे ज्यादा मुफीद लगा। पीलीभीत के अलावा कुछ विस्थापित परिवार रामपुर और बिजनौर जिलों में भी जाकर बस गए थे।

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जमीन पर मालिकाना हक और आधार कार्ड की स्थिति

पीलीभीत जिले के अमरिया, न्यूरिया और शारदा डैम की तलहटी जैसे इलाकों में रहने वाले इन परिवारों ने दशकों पहले इस बंजर और उबड़-खबड़ जमीन को अपनी कड़ी मेहनत से खेती करने लायक बनाया था। आज इन क्षेत्रों में बहुत अच्छी फसलें उगती हैं और इन सभी लोगों के पास भारत के कानूनी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड पहले से ही मौजूद थे। ये लोग लंबे समय से स्थानीय चुनावों में लगातार मतदान भी करते आ रहे थे, लेकिन कानूनी रूप से देश की नागरिकता और अपनी जमीन का मालिकाना हक मिलने से लगातार वंचित रह गए थे। पहले की कई सरकारों ने इन्हें केवल झूठे आश्वासन दिए थे लेकिन साल 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादे को अब मौजूदा सरकार ने पूरी तरह से जमीन पर उतार दिया है।

करीब 2500 परिवारों को मिला नागरिकता प्रमाण पत्र

प्रदेश सरकार की इस खास पहल के बाद अधिकारियों ने सभी पीड़ित परिवारों की एक सूची तैयार की और कुल 2500 परिवारों को जिनकी अनुमानित संख्या लगभग 15 हजार है, उन्हें नागरिकता के दस्तावेज सौंपे। ये सभी लोग वर्ष 1960 से 1975 के बीच धार्मिक प्रताड़ना से परेशान होकर पूर्वी बंगाल से भारत आए थे और पीलीभीत की कलीनगर तथा पूरनपुर तहसीलों के करीब 25 से 26 गांवों में बस गए थे। पिछले महीने की 29 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद जिले का दौरा किया और अपने हाथों से इन सभी विस्थापितों को नागरिकता के प्रमाण पत्र के साथ-साथ जमीन के मालिकाना हक के सरकारी कागज भी दिए।

आने वाले महीनों में अन्य जिलों के विस्थापितों को भी मिलेगी नागरिकता

यह पूरा फैसला ऐसे समय में लिया गया जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, जिसके कारण इस कदम पर राज्य की राजनीति भी काफी गर्माई हुई है और विपक्षी दल इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बता रहे हैं। पाकिस्तानी विस्थापितों को बसाने और नागरिकता देने का यह अभी केवल पहला चरण पूरा हुआ है जबकि दूसरा चरण अभी बाकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के बहराईच, बाराबंकी, गोंडा, लखीमपुर और बिजनौर जैसे अन्य जिलों में करीब 35 हजार लोग और रहते हैं जिनकी पहचान का काम पूरा हो चुका है। अगले कुछ महीनों के भीतर इन सभी बचे हुए लोगों को भी देश की पक्की नागरिकता देने का फैसला प्रशासन की तरफ से लिया जा चुका है।

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