Palestine: फिलिस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास ने इसराइली E1 सेटलमेंट विस्तार के अंतरराष्ट्रीय विरोध का किया स्वागत

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, कनाडा और नॉर्वे द्वारा जारी किए गए संयुक्त अंतरराष्ट्रीय बयान का औपचारिक रूप से स्वागत किया है। यह बयान इसराइल की ओर से E1 सेटलमेंट योजना को आगे बढ़ाने के प्लान को पूरी तरह से खारिज करता है। इन देशों ने हाउसिंग टेंडर जारी करने के फैसले को अस्वीकार्य बताया है और चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। साथ ही, इससे वेस्ट बैंक के टुकड़े-टुकड़े होने से दो-राज्य समाधान की संभावना को भारी खतरा पैदा हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने यह भी अंदेशा जताया है कि इस योजना से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम के बीच भौगोलिक दूरियां बढ़ जाएंगी, जिससे क्षेत्रीय शांति प्रयासों को गहरा झटका लगेगा। इस बारे में अधिक जानकारी Qatar News Agency (QNA) पर दी गई है।
अब्बास ने E1 प्रोजेक्ट को बताया खतरनाक escalation
राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने E1 प्रोजेक्ट को एक खतरनाक escalation और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 का खुला उल्लंघन करार दिया है। राष्ट्रपति के आधिकारिक प्रवक्ता Nabil Abu Rudeineh ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे सिर्फ निंदा करने तक सीमित न रहें, बल्कि इस विस्तार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात क्षेत्र को नियंत्रण से बाहर कर सकते हैं। इस बीच, स्पेन और स्वीडन ने भी इस योजना के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है, जबकि बेल्जियम के विदेश मंत्री Maxime Prevot ने इन टेंडर्स को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है।
इसराइली सरकार ने शुरू की टेंडर प्रक्रिया
इसराइली सरकार ने 18 अगस्त 2026 को 1,234 हाउसिंग यूनिट्स के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की थी। यह संख्या इस प्रोजेक्ट के तहत स्वीकृत कुल 3,401 घरों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है, जो इसराइल में होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले है जो 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटिश विदेश सचिव Ed Miliband ने 20 अगस्त 2026 को इसराइली चार्ज डी अफेयर्स को तलब किया। इससे यह संकेत मिलता है कि यूके सेटलमेंट विस्तार में शामिल लोगों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।
इसराइली विदेश मंत्री का बयान और E1 प्रोजेक्ट का असर
दूसरी ओर, इसराइली विदेश मंत्री Gideon Saar ने ब्रिटिश रुख को खारिज करते हुए क्षेत्र में यहूदी लोगों के रहने के अधिकार पर जोर दिया। E1 प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य Ma'ale Adumim सेटलमेंट को कब्जे वाले यरुशलम से जोड़ना है। इस कदम को एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण के लिए एक बड़े अस्तित्व के खतरे के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आम जनता और क्षेत्रीय शांति पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।