West Bank में सख्‍त नियमों का असर, फिलिस्तीनी परिवार गुफा में रहने को मजबूर

Aanya18 August 20263 min read61 viewsWorld
West Bank में सख्‍त नियमों का असर, फिलिस्तीनी परिवार गुफा में रहने को मजबूर

कब्जे वाले वेस्ट बैंक में रहने वाले Farhan al Rashaydeh और उनके परिवार को मजबूरी में एक गुफा में रहना पड़ रहा है। इस परिवार के सामने यह अजीब स्थिति इजराइल की बेहद सख्त निर्माण नीतियों की वजह से आई है, जो अक्सर फिलिस्तीनी नागरिकों को अपने ही जमीन पर घर बनाने के लिए कंस्ट्रक्शन परमिट देने से साफ इनकार कर देती है। Al Jazeera की रिपोर्टर Leila Warah के अनुसार, यह परिवार भले ही अपनी इस गुफा वाले घर में रहने की बात कहता हो, लेकिन असलियत यह है कि यह कदम इलाके में चल रहे कड़े परमिट नियमों के विरोध और मजबूरी का नतीजा है। यह पूरा इलाका मुख्य तौर पर Area C के अंतर्गत आता है, जो पूरी तरह से इजरायली सिविल और सुरक्षा नियंत्रण के अधीन है।

वेस्ट बैंक में विस्थापन का बढ़ता संकट

फराह अल रशायदेह के परिवार जैसी ही परेशानी आज पूरे कब्जाए गए वेस्ट बैंक में रहने वाले हजारों लोगों की बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र यानी UN के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2026 में हर महीने औसतन 160 लोगों को अपने घरों को छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह आंकड़े साल 2009 से लेकर अब तक के सबसे ज्यादा हैं जब से संयुक्त राष्ट्र ने इस तरह के मामलों का रिकॉर्ड रखना शुरू किया है। आंकड़ों के मुताबिक, 21 जुलाई 2026 तक इजरायली अधिकारियों ने कुल 333 फिलिस्तीनी इमारतों को या तो गिरा दिया, जब्त कर लिया या फिर लोगों को खुद ही उन्हें तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। इसके अलावा, 11 फरवरी 2026 को जारी एक यूएन ब्रीफिंग में यह बात सामने आई कि इस साल अब तक लगभग 3,800 फिलिस्तीनी लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि 18 अगस्त की रिपोर्ट्स के अनुसार साल भर के दौरान करीब 3,200 लोग विस्थापित हुए और लगभग 900 लोग घायल हुए हैं।

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अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की कड़ी नजर और मानवाधिकारों के मुद्दे

इस तरह की घटनाओं और कड़े नियमों को लेकर दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं और स्थिति पर गहरी चिंता जता रहे हैं। मानवाधिकार संगठन Amnesty International ने हाल ही में 18 अगस्त 2026 को एक विशेष टूलकिट जारी किया है, जिसमें इजराइल की इन कार्रवाईयों को बद्दू और चरवाहा समुदायों के खिलाफ एक प्रकार का नस्लीय सफाया करार दिया गया है। संगठन के मुताबिक, जनवरी 2023 से लेकर अप्रैल 2026 के बीच लगभग 5,910 लोगों को जबरन उनके घरों से निकाला गया और कुल 117 ऐसे समुदाय हैं जिन पर हमेशा विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। इससे पहले, यूरोपीय संघ की परिषद यानी European Council ने इसी साल मई 2026 में इजरायली बस्तियों से जुड़े संगठनों और कुछ चुनिंदा व्यक्तियों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, जिसका मुख्य कारण गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताए गए थे।

कानूनी बदलाव और बस्तियों का विस्तार

इस पूरे मामले में प्रशासनिक और विधाई बदलावों ने स्थिति को आम लोगों के लिए और ज्यादा जटिल बना दिया है। इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने बीते 8 फरवरी 2026 को वेस्ट बैंक में इजरायली अधिकार क्षेत्र और नियंत्रण को बढ़ाने के लिए कई नए उपायों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव की एक रिपोर्ट के मुताबिक 21 जुलाई 2026 को सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 के तहत यह बात सामने आई थी कि इजरायली अधिकारियों ने बस्तियों के लिए लगभग 4,750 नए आवास यूनिट्स को मंजूरी दी है या उन्हें आगे बढ़ाया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इन बस्तियों का निर्माण पूरी तरह से अवैध माना गया है।

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