अमेरिका पर बढ़ा युद्ध का दबाव, ईरान से जंग के बीच पेंटागन ने मांगा हथियारों का नया उत्पादन प्लान.

Sushma Kumari13 August 20263 min read82 viewsWorld
अमेरिका पर बढ़ा युद्ध का दबाव, ईरान से जंग के बीच पेंटागन ने मांगा हथियारों का नया उत्पादन प्लान.

ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है और इसी कड़ी में अमेरिकी रक्षा विभाग अपने हथियारों और मिसाइलों के भंडार को तेजी से भरने की पूरी कोशिश में जुट गया है। द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों से हथियारों का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ाने और डिलीवरी की समय-सीमा को काफी कम करने के लिए नए प्रस्ताव मांगे हैं। इस बड़ी तैयारी से यह साफ पता चलता है कि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व अब आने वाले समय में किसी भी लंबी अवधि के संघर्ष से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को पुख्ता करने में लगा हुआ है।

डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी ने भेजा मेमो

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) की एक रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीफन फीनबर्ग की ओर से रक्षा उद्योग के प्रमुखों को एक खास मेमो भेजा गया है। इस मेमो में सभी प्रमुख रक्षा कंपनियों से कहा गया है कि वे अपने उत्पादन की क्षमता को तुरंत बढ़ाएं, डिलीवरी का समय कम करें या फिर इन दोनों के लिए अपनी नई योजनाएं जल्द से जल्द पेश करें। कंपनियों को अपने ये सभी जरूरी प्रस्ताव तैयार करने के लिए केवल 21 दिनों का समय दिया गया है।

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अपने इस मेमो में स्टीफन फीनबर्ग ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि अब हथियारों के विकास और उनके उत्पादन के पुराने और लंबे चक्र बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पेंटागन की यह साफ इच्छा है कि महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों की कुल उत्पादन क्षमता में भारी बढ़ोतरी की जाए। इसके साथ ही भविष्य में बड़ी मात्रा में लगातार मिलने वाले ऑर्डर को समय पर पूरा करने के लिए सभी कंपनियों को अपनी मौजूदा सुविधाओं और पूरी आपूर्ति श्रृंखला यानी सप्लाई चेन में बड़ा निवेश करना होगा।

पेंटागन की मुख्य प्राथमिकताएं

इस पूरी योजना के तहत पेंटागन की प्राथमिक सूचियों में कई अत्याधुनिक चीजें शामिल हैं। इनमें मुख्य तौर पर अगली पीढ़ी की एयर-डिफेंस प्रणालियां, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और अंतरिक्ष आधारित मिसाइल-ट्रैकिंग क्षमताएं शामिल हैं। ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने बहुत बड़ी संख्या में सटीक-निर्देशित हथियारों और एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर का खुलकर इस्तेमाल किया है।

वॉशिंगटन पोस्ट की एक मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष के शुरुआती केवल चार हफ्तों के भीतर ही अमेरिकी सेना ने 850 से अधिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी थीं। इसके अलावा, ईरान की तरफ से होने वाले जवाबी हमलों को बीच में ही रोकने के लिए 1,000 से अधिक एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए जाने का अनुमान भी अधिकारियों ने दिया था। युद्ध के शुरुआती कुछ दिनों से ही अमेरिका के हथियारों के भंडार पर भारी दबाव साफ दिखने लगा था।

भारी वित्तीय दबाव और बजट की मांग

रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के पहले दो दिनों में ही अमेरिकी सेना ने लगभग 5.6 अरब डॉलर मूल्य के गोला-बारूद खर्च कर दिए थे। स्थिति को संभालते हुए पेंटागन ने अतिरिक्त थाड और पैट्रियट क्षमताओं को भी दुनिया के दूसरे हिस्सों से हटाकर मध्य पूर्व की ओर स्थानांतरित कर दिया था। हालांकि अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह बात कई बार जोर देकर कही है कि सेना के पास अपने मौजूदा अभियानों को चलाने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त हथियार मौजूद हैं और उन्होंने हथियारों की कमी से जुड़ी सभी चिंताओं को खारिज किया है।

लेकिन दूसरी तरफ, जुलाई में आई रिपोर्टों के मुताबिक पेंटागन को इस युद्ध की वजह से गंभीर बजट दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इसी वित्तीय दबाव के चलते उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से 67 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की भारी मांग की है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि यदि उन्हें यह अतिरिक्त धन समय पर नहीं मिला, तो सेना के नियमित प्रशिक्षण और रख-रखाव जैसी बहुत सी जरूरी गतिविधियों को भी मजबूरन सीमित करना पड़ सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर हथियारों की कमी की इन सभी खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि देश के पास हथियारों का पर्याप्त भंडार है और नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं।

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