Pentagon का बड़ा कदम, फारस की खाड़ी से अमेरिकी सैनिकों को हटाने पर विचार, ईरान युद्ध का खर्च पहुंचा 37.5 अरब डॉलर

Nura Basta20 August 20262 min read72 viewsWorld
Pentagon का बड़ा कदम, फारस की खाड़ी से अमेरिकी सैनिकों को हटाने पर विचार, ईरान युद्ध का खर्च पहुंचा 37.5 अरब डॉलर

पेंटागन अब फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करने पर विचार कर रहा है। ईरान के साथ चल रहे लंबे तनाव और हमलों की वजह से मध्य पूर्व के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। 20 अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी सैनिकों को पश्चिम की ओर शिफ्ट करने की योजना बना रहे हैं ताकि उन्हें ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाया जा सके। इस बारे में U.S. Secretary of War Pete Hegseth के मंत्रालय की तरफ से अभी कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया गया है, लेकिन वरिष्ठ रक्षा अधिकारी इसे भविष्य की सुरक्षा के लिए एक जरूरी कदम मान रहे हैं।

ईरान के खिलाफ युद्ध का भारी वित्तीय और सैन्य असर

यह संघर्ष पिछले कई महीनों से जारी है और इस दौरान अमेरिकी बलों ने ईरानी ठिकानों पर 13,000 से ज्यादा हमले किए हैं। इस सैन्य अभियान का वित्तीय खर्च सितंबर के अंत तक 37.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस भारी-भरकम आंकड़े में बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए अनुमानित 5 अरब अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं है। फरवरी में यह संघर्ष शुरू होने से पहले ही CENTCOM ने उन तमाम इलाकों से अपने कर्मियों को पहले ही हटा लिया था जहां ईरानी हमलों का सबसे ज्यादा खतरा था। पिछले महीने जॉर्डन में हुए एक ईरानी हमले में चार अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो गई थी।

सैनिकों की कमी के बावजूद खाड़ी देशों को मिलता रहेगा सहयोग

CENTCOM आमतौर पर करीब 20 क्षेत्रीय ठिकानों पर 40,000 सैनिकों को तैनात रखता है। इसका नेतृत्व एडमिरल ब्रैडली कूपर कर रहे हैं, जिन्होंने सैनिकों को पश्चिम की ओर शिफ्ट करने के विचार का समर्थन किया है। नीति कार्यालय और ज्वॉइंट स्टाफ इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि युद्ध के बाद कौन सी सैन्य तैनाती को स्थायी रखा जाना चाहिए। अरेबियन प्रायद्वीप मामलों की पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद निदेशक एलिसन माइनर ने इस बात पर जोर दिया कि रणनीतिक चर्चाओं में केवल सैनिकों की गिनती तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को व्यापक रूप से देखना जरूरी है। हालांकि कुछ सैनिक कम हो सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों को अमेरिकी खुफिया जानकारी, हथियार सहायता और सैन्य सहयोग मिलना जारी रहेगा, जैसा कि आधिकारिक जानकारी में बताया गया है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment