India Energy Self Reliance: पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, देश के समुद्र तटों पर तेल और गैस खोजने की मिली अनुमति.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने देश के 99 प्रतिशत तटीय पानी से सभी तरह की रोक हटा दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और विदेशों पर निर्भरता को कम करना है। सरकार ने इस नई सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना की शुरुआत की है, जिससे आने वाले समय में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बहुत मदद मिलेगी।
समुद्र मंथन योजना और बजट की पूरी जानकारी
इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी 31 जुलाई 2026 को मिली थी। इस पहले चरण के लिए सरकार ने लगभग ₹84,084 करोड़ का भारी-भरकम बजट तय किया है जो साल 2031 तक खर्च किया जाएगा। इस पूरी परियोजना का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। इस योजना का मुख्य लक्ष्य भारत के सालाना हाइड्रोकार्बन उत्पादन को 62 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 80 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचाना है। इसके साथ ही देश के संसाधन आधार को भी 2.2 अरब टन तेल समतुल्य तक विस्तारित करने की योजना बनाई गई है। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक PIB Release पर उपलब्ध है।
डीप-सी एक्सप्लोरेशन से क्या होगा फायदा
इस नई नीति के तहत सरकार ने सिस्मार्क डेटा जुटाने, 60 गहरे पानी के कुओं की ड्रिलिंग करने और एक एकीकृत तेल और गैस विनिर्माण क्षेत्र बनाने के लिए बड़ा फंड निर्धारित किया है। जब देश के भीतर ही तेल और गैस की खोज का काम तेजी से होगा, तो इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाला अरबों रुपया बचेगा। इस बारे में ANI News रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री ने इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। घरेलू स्तर पर तकनीक का विकास होने से देश में तकनीकी नेतृत्व भी बढ़ेगा और एक विकसित भारत के निर्माण का रास्ता साफ होगा। इस ऐतिहासिक घोषणा के बारे में अन्य जानकारी UNI India की रिपोर्ट में भी विस्तार से बताई गई है।