पोखरा में भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती की मांग, पूर्व सैनिकों ने सरकार को सौंपा ज्ञापन.

Sushma Kumari15 August 20263 min read73 viewsIndia
पोखरा में भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती की मांग, पूर्व सैनिकों ने सरकार को सौंपा ज्ञापन.

भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट में नेपाली युवाओं की रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी सिलसिले में 12 अगस्त को नेपाल के पोखरा में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व भारतीय सैनिकों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि नेपाल सरकार को इस मामले में तुरंत भारत सरकार से बातचीत करनी चाहिए ताकि युवाओं के सामने आ रहा रोजगार का संकट दूर हो सके।

पोखरा में निकला प्रदर्शन और सौंपा गया ज्ञापन

भारतीय भूतपूर्व सैनिक गोर्खा ब्रिगेड नेपाल के नेतृत्व में पोखरा के अलग-अलग इलाकों से एक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस जिला प्रशासन कार्यालय कास्की पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख जिला अधिकारी कुमारसिंह गुरुङ के जरिए सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्णबहादुर खत्री के हस्ताक्षर वाले इस ज्ञापन में देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचा गया है। पूर्व सैनिकों की मांग है कि भारतीय सेना में भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी देरी के फिर से शुरू कराया जाए और पूर्व सैनिकों से जुड़ी संस्थाओं के नवीकरण का काम भी आसान किया जाए।

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क्या है नेपाली गोरखाओं की भर्ती का इतिहास

इस परंपरा का इतिहास बहुत पुराना है। ज्ञापन के मुताबिक, साल 1814 से 1816 के बीच हुए नेपाल-अंग्रेज युद्ध और सुगौली संधि के बाद ब्रिटिश इंडिया सरकार ने सेना में नेपाली गोरखाओं को शामिल करना शुरू किया था। देश की आजादी के बाद भी यह सिलसिला लगातार जारी रहा और इस तरह गोरखा सैनिकों की भर्ती का यह इतिहास करीब 211 साल पुराना हो चुका है। लेकिन साल 2022 में भारत सरकार द्वारा लाई गई ‘अग्निपथ’ योजना के लागू होने के बाद, नेपाल सरकार ने कुछ कारणों का हवाला देते हुए भारतीय सेना में अपने युवाओं की भर्ती पर रोक लगा दी थी।

अग्निपथ योजना और वित्तीय नुकसान

कर्नल कृष्णबहादुर खत्री ने जानकारी दी कि अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष की उम्र के युवाओं को ‘अग्निवीर’ के रूप में चुना जाता है। इनमें से चार साल की सेवा पूरी होने के बाद सिर्फ 25 प्रतिशत युवाओं को ही पक्की नौकरी पर रखा जाता है। बाकी बचे 75 प्रतिशत युवाओं को सेवा पूरी होने के बाद करीब 18 लाख 71 हजार रुपये की एकमुश्त रकम देकर विदा किया जाता है। इसके अलावा उन्हें अर्धसैनिक बलों और बड़ी कंपनियों में काम के लिए प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है।

कर्नल खत्री का यह भी कहना है कि इन चार सालों के दौरान एक युवा अपनी मेहनत से करीब 45 से 50 लाख रुपये तक की कमाई कर सकता था। यह रास्ता बंद होने की वजह से आज लाखों नेपाली युवा अच्छे रोजगार से महरूम हो गए हैं। मजबूरी में इन युवाओं को खाड़ी देशों में जाकर लगभग 50 डिग्री सेल्सियस की भयानक गर्मी में बेहद कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है।

रेमिटेंस और कल्याणकारी योजनाओं पर असर

पूर्व सैनिकों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि भर्ती लंबे समय तक बंद रहने से देश की आर्थिकी को भी बड़ा नुकसान हो रहा है। नेपाल आने वाला पूर्व सैनिकों का अरबों रुपये का रेमिटेंस और कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाला फायदा सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। पूर्व गोरखा सैनिकों ने सरकार को सलाह दी है कि चूंकि अग्निवीर योजना का पांच साल का परीक्षण चरण जून 2027 में खत्म होने वाला है, इसलिए नेपाल सरकार को बिना एक पल गंवाए अभी से ही भारत सरकार के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू कर देना चाहिए।

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