Qatar को अमेरिका से मिला बड़ा तोहफा, 4.5 अरब डॉलर में खरीदेगा KC-46A टैंकर विमान.

कतर की वायु सेना के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश विभाग ने कतर सरकार को 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग भारतीय रुपयों में एक बहुत बड़ी रकम के संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस सौदे के तहत कतर को आधुनिक सैन्य उपकरण और विमान मिलने वाले हैं जिससे उसकी ताकत में काफी इजाफा होगा। यह प्रस्ताव अब समीक्षा के लिए अमेरिकी कांग्रेस के पास भेज दिया गया है ताकि आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
कतर को मिलेंगे खास विमान और उपकरण
इस प्रस्तावित समझौते के अनुसार कतर को मुख्य रूप से चार KC-46A Pegasus एरियल रिफ्यूलिंग विमान यानी हवा में ही विमानों में ईंधन भरने वाले विमान मिलेंगे। इसके साथ ही कतर को अन्य जरूरी उपकरण भी दिए जाएंगे। इस डील का मुख्य उद्देश्य कतर की वायु सेना में हवा में ईंधन भरने की क्षमता को स्थापित करना है। इससे पहले कतर ने एयरबस के ऐसे ही विमानों पर विचार किया था लेकिन कोई पक्का अनुबंध नहीं हुआ था। अब इस नई डील के बाद कतर के लड़ाकू विमान जैसे कि F-15QA, Rafale और Typhoon हवा में अधिक समय तक टिक सकेंगे और उनकी मारक क्षमता काफी दूर तक बढ़ जाएगी।
मिलेगा इंजनों और सुरक्षा प्रणालियों का पूरा पैकेज
इस बड़े रक्षा पैकेज में केवल विमान ही शामिल नहीं हैं बल्कि कई तरह के स्पेयर पार्ट्स और सुरक्षा प्रणालियां भी दी जा रही हैं। इसमें कुल आठ PW4062 टर्बोफैन इंजन शामिल हैं जिनमें से चार विमानों में लगे होंगे और चार अतिरिक्त स्पेयर के रूप में रखे जाएंगे। इसके अलावा दस AN/ALR-69A रडार वार्निंग रिसीवर भी इस सौदे का हिस्सा हैं। विमानों की सुरक्षा के लिए पंद्रह गार्डियन लेजर ट्रांसमीटर असेंबली, मिसाइल वार्निंग सेंसर और फ्रेंड या फो की पहचान करने वाले ट्रांसपोंडर भी प्रदान किए जाएंगे।
विभिन्न अमेरिकी कंपनियां करेंगी निर्माण
इस विशाल सौदे में विमान बनाने का मुख्य काम प्रसिद्ध कंपनी Boeing द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा इंजन निर्माण के लिए प्रैट एंड ह्विटनी मिलिट्री इंजन और अन्य एकीकृत प्रणालियों के लिए आरटीएक्स कॉर्पोरेशन और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन कॉर्पोरेशन जैसी बड़ी कंपनियां मुख्य ठेकेदार के रूप में शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि इस बिक्री से कतर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा की भूमिका को और मजबूत करेगा और सहयोगी देशों के साथ उसकी सैन्य क्षमता का तालमेल बेहतर होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि इन नई क्षमताओं को अपनाने के लिए कतर को अपनी जमीन पर किसी भी अतिरिक्त अमेरिकी सैन्यकर्मी की जरूरत नहीं पड़ेगी।