West Bank में इस्राइली Settlers का कहर, Qusra गांव में 15 फिलिस्तीनी परिवार दूसरे हफ्ते भी घेराबंदी में कैद.

Sushma Kumari16 August 20262 min read63 viewsWorld
West Bank में इस्राइली Settlers का कहर, Qusra गांव में 15 फिलिस्तीनी परिवार दूसरे हफ्ते भी घेराबंदी में कैद.

वेस्ट बैंक के Qusra गांव में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं जहां इस्राइली सेटलर्स की घेराबंदी का दूसरा हफ्ता शुरू हो गया है। इस गंभीर मानवीय संकट के बीच कुल 15 फिलिस्तीनी परिवार, जिनमें दो बच्चे और एक दोहरी अमेरिकी नागरिकता वाला शख्स भी शामिल है, अपने ही घरों में फंसे हुए हैं। इन परिवारों पर यह आफत 9 अगस्त 2026 से लगातार बनी हुई है और सेटलर्स ने उनके घरों की तरफ आने जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए हैं।

पानी और बिजली की भारी किल्लत से जूझ रहे लोग

रास अल-ऐन इलाके में रहने वाले अबू रिदा और हसन कबीले के इन परिवारों को इस घेराबंदी के कारण बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सेटलर्स ने इन लोगों के जरूरी सामान, पानी और बिजली की सप्लाई पूरी तरह से काट दी है जिससे वहां रहने वाले आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इस बीच इस्राइली सेना ने उस पूरे इलाके को एक बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया है ताकि कोई भी एक्टिविस्ट या बाहरी व्यक्ति अंदर जाकर उन लोगों की मदद न कर सके। हालांकि, इस पाबंदी के बावजूद संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों ने रविवार की सुबह किसी तरह से उन फंसे हुए लोगों तक सीमित मात्रा में राहत सामग्री पहुंचाने का काम सफलताי से पूरा किया।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है कड़ी निंदा

इस पूरी घटना के बाद से दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी निंदा की जा रही है। अमेरिका के इस्राइल में राजदूत माइक हक्काबी ने सेटलर्स की इन हरकतों को एक भयानक आतंकवादी कृत्य करार दिया है। इसके अलावा एमनेस्टी इंटरनेशनल और स्पेन की सरकार ने भी बहुत कड़े शब्दों में इस घटना की आलोचना की है और इसे सेटलर्स की हिंसा का एक सुनियोजित हिस्सा बताया है। राहत और बचाव से जुड़ी विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं।

फिलहाल इस्राइली सैनिक कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मौके पर तैनात हैं लेकिन स्थानीय नागरिकों के आने-जाने पर अभी भी सख्त पाबंदियां लगी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर नजर रखने वाले संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो इन परिवारों को जबरन उनके घरों से विस्थापित होना पड़ सकता है जिससे वहां का माहौल और ज्यादा खराब होने की आशंका बनी हुई है।

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