भारतीय रेलवे: ट्रेन में चादर और तौलिया चुराने वालों का खामियाजा भुगत रहे कर्मचारी, वेतन से कट रहे हजारों रुपये

ट्रेन में सफर करने वाले कई यात्री सफर के दौरान रेलवे की संपत्ति जैसे तौलिया, चादर और कंबल को अपने साथ घर ले जाते हैं, लेकिन इस छोटी सी लापरवाही का बड़ा असर कोच अटेंडेंट की जेब पर पड़ रहा है। एक कोच अटेंडेंट ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि यात्रियों की इस हरकत की वजह से उनकी मेहनत की कमाई पर सीधा असर हो रहा है और महीने के अंत में उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
वेतन से की जा रही है भारी कटौती
एक कोच अटेंडेंट की औसत मासिक आय करीब ₹15,000 होती है। जब कोई यात्री चादर या तौलिया चोरी कर लेता है, तो रेलवे प्रशासन उस नुकसान की भरपाई संबंधित स्टाफ से करता है। जानकारी के अनुसार, एक चादर की कीमत ₹300 से ₹500 के बीच होती है। कोच में सामान कम होने पर स्टाफ के वेतन से हर महीने ₹3,000 से ₹5,000 तक की कटौती कर ली जाती है। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी रकम है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए इस काम पर निर्भर हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं
रेलवे की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच एसी कोचों से लगभग 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम गायब हुए हैं। इनमें तौलिये, बेडशीट और कंबल शामिल हैं। बार-बार निवेदन करने के बावजूद यात्री इन्हें अपने साथ ले जाते हैं, जिसका सीधा खामियाजा उन फ्रंटलाइन वर्कर्स को भुगतना पड़ता है जो इन चीजों की देखभाल के लिए जिम्मेदार होते हैं।
रेलवे प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर रेलवे के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि वे एजेंसियां जो कोच में लिनन (कपड़ों) का प्रबंधन करती हैं, उन्हें ही शॉर्टेज के लिए जिम्मेदार माना जाता है। रेलवे इन गुमशुदा वस्तुओं की कीमत सीधे उन एजेंसियों के बिल से वसूलता है। इसके बाद एजेंसियां अपने कर्मचारियों के वेतन से यह पैसा काटती हैं। हालांकि, यह स्थिति यात्रियों की जिम्मेदारी और रेलवे कर्मचारियों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को लेकर एक नई बहस का कारण बन गई है। आम यात्रियों को यह समझना चाहिए कि उनका एक कदम किसी गरीब कर्मचारी के परिवार की जरूरतों पर भारी पड़ सकता है।