Red Sea में संकट: भारतीय जहाज पर हुआ हमला, हुती विद्रोहियों के ब्लॉकेड से सऊदी और भारत की सप्लाई पर बड़ा असर.

Sushma Kumari5 August 20262 min read65 viewsSaudi
Red Sea में संकट: भारतीय जहाज पर हुआ हमला, हुती विद्रोहियों के ब्लॉकेड से सऊदी और भारत की सप्लाई पर बड़ा असर.

लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। 4 अगस्त 2026 को एक भारतीय ध्वज वाले कमर्शियल जहाज MSV Faize Noore Oliya पर हुए अचानक हमले ने व्यापारिक दुनिया में हलचल मचा दी है। इस हमले में जहाज डूब गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 क्रू मेंबर्स, जिनमें 13 भारतीय और एक यमनी नागरिक शामिल थे, सुरक्षित बचा लिए गए। भारत सरकार ने इस हमले को बिना किसी उकसावे के की गई कार्रवाई करार दिया है, जबकि यमन की सरकार ने इसके लिए ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है।

हुती विद्रोहियों का ब्लॉकेड और समुद्री व्यापार पर असर

यह घटनाक्रम हुती विद्रोहियों द्वारा 20 जुलाई 2026 को सऊदी अरब के बंदरगाहों के खिलाफ घोषित नौसैनिक नाकाबंदी के बाद सामने आया है। विद्रोहियों का कहना है कि यह कदम यमन की घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है। इस तनाव का असर समुद्री यातायात पर साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, बाब अल-मंडेब से गुजरने वाले कुल जहाजों की संख्या में 22 प्रतिशत की कमी आई है। विशेष रूप से तेल ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही में 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के लिए तो स्थिति और भी गंभीर है, जिनकी आवाजाही में 46 प्रतिशत तक की कटौती देखी गई है।

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सुरक्षा के लिए लंबा रूट और डार्क ऑपरेशंस

सुरक्षा के इन गंभीर खतरों के कारण, कई तेल कंपनियां अब अपने जहाजों को लाल सागर और स्वेज नहर के बजाय केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से भेज रही हैं। अफ्रीका के चक्कर लगाकर जाने वाला यह रास्ता एशिया जाने वाले शिपमेंट्स में कम से कम दो सप्ताह का अतिरिक्त समय जोड़ देता है। वर्तमान में 6 सऊदी स्वामित्व वाले विशाल क्रू़ड कैरियर अपना रास्ता बदल चुके हैं। इसके अलावा, कई जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने AIS ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं, जिसे समुद्री भाषा में 'डार्क ऑपरेशंस' कहा जाता है। यह स्थिति क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ते तनाव को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और नई चुनौतियां

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच 14 जुलाई 2026 को अमेरिका ने ईरान जाने वाले या वहां से आने वाले जहाजों पर एक नई नाकाबंदी लगा दी है, जिससे समुद्री चुनौतियों में इजाफा हुआ है। हालांकि, जुलाई के अंत में दो पाकिस्तानी ध्वज वाले तेल टैंकर सऊदी कच्चा तेल लेकर इस क्षेत्र से सुरक्षित निकल गए थे, लेकिन उसके बाद से स्थिति बहुत ज्यादा संवेदनशील हो गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों और समुद्री मार्ग से व्यापार करने वाले व्यापारियों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इससे आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक लागत पर सीधा असर पड़ रहा है।

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