Rohingya Genocide: रोहिंग्या संकट के पूरे हुए नौ साल, म्यांमार में अत्याचार और पलायन जारी.

Aanya25 August 20263 min read60 viewsWorld
Rohingya Genocide: रोहिंग्या संकट के पूरे हुए नौ साल, म्यांमार में अत्याचार और पलायन जारी.

म्यांमार की सेना द्वारा 25 अगस्त 2017 को शुरू किए गए हिंसक अभियान के आज नौ साल पूरे हो चुके हैं। इस सैन्य कार्रवाई के कारण 7 लाख से ज्यादा रोहिंग्या लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था और आज भी उनका संघर्ष लगातार जारी है। दुनिया भर में इस गंभीर मानवीय संकट को लेकर चिंता जताई जा रही है और मानवाधिकार संगठनों द्वारा लगातार न्याय की मांग की जा रही है।

न्याय और सुरक्षा की मांग

बर्मीज रोहिंग्या ऑर्गेनाइजेशन यूके के अध्यक्ष टुन खिन ने अलजजीरा में छपे अपने लेख में बताया कि रोहिंग्या समुदाय के लिए न्याय का मतलब केवल राहत सामग्री नहीं है। उनका कहना है कि न्याय का असली मतलब यह है कि रोहिंग्या लोग म्यांमार में बिना किसी डर और उत्पीड़न के स्वतंत्र और समान नागरिकों की तरह जीवन जी सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह नरसंहार कभी रुका ही नहीं है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा रोहिंग्या लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम नाकाफी साबित हुए हैं।

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म्यांमार में लगातार अत्याचार और पलायन

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर ने 25 अगस्त 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि म्यांमार में रोहिंग्या लोगों को म्यांमार सेना और अराकान आर्मी दोनों के द्वारा अमानवीय अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है। समुदाय के लोगों को जबरन सेना में भर्ती किया जा रहा है, जबरन काम कराया जा रहा है, बिना वजह हिरासत में लिया जा रहा है और मानवीय सहायता तक पहुंचने से रोका जा रहा है। इस दर्दनाक और गंभीर स्थिति के कारण लोग जान जोखिम में डालकर देश छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

साल 2026 की पहली तिमाही में खतरनाक समुद्री यात्राओं के जरिए पलायन करने वालों की संख्या में 90 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा जुलाई 2026 में म्यांमार के तट के पास दो नावें डूब गईं, जिससे लगभग 500 लोगों की जान चली गई। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और समुद्र में जान गंवाने वाले 530 लोगों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए शरणार्थियों की सुरक्षित और स्वैच्छिक वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करने की बात कही है। इस बारे में अधिक जानकारी DFAT Media Release पर देखी जा सकती है।

बांग्लादेश में शरणार्थियों की बदतर हालत

पड़ोसी देश बांग्लादेश में इस समय लगभग 1.2 मिलियन यानी 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं, जहां उनके रहने की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा खाद्य सहायता को घटाकर मात्र 7 अमेरिकी डॉलर प्रति माह कर दिया गया है, जिससे शरणार्थियों के लिए रोजमर्रा का जीवन चलाना बहुत मुश्किल हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई जारी

रोहिंग्या संकट के दोषियों को सजा दिलाने के लिए दुनिया भर में कानूनी प्रयास चल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नरसंहार का मामला चल रहा है और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत के अभيوکता द्वारा मिन आंग हलांग के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग की गई है। इसके अलावा अर्जेंटीना में सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र के तहत म्यांमार के सैन्य अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किए गए हैं। ब्लड मनी कैंपेन और प्रोग्रेसिव वॉयस जैसे नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन ने 25 अगस्त को एक घोषणापत्र जारी कर तुरंत अंतरराष्ट्रीय कानूनी हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि केवल याद करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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