रोहिंग्या शरणार्थियों ने म्यांमार हिंसा के नौ साल पूरे होने पर न्याय की मांग की, बांग्लादेश कैंपों में हालात खराब

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार कैंपों में हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों ने 25 अगस्त 2026 को म्यांमार में हुए सैन्य क्रूरता के नौ साल पूरे होने पर बड़ा प्रदर्शन किया। यूनाइटेड काउंसिल ऑफ रोहिंग्या जैसे संगठनों द्वारा आयोजित इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य नागरिकता, बुनियादी अधिकारों और रखाइन राज्य में अपने घरों को सुरक्षित रूप से वापस लौटना है। इस बड़े विस्थापन का दर्द झेलने वाली 32 वर्षीय प्रतिभागी सबिकुन्नहार ने नौ साल पहले हुई उस हिंसा को याद किया जिसमें सिर काटने और घरों को नष्ट करने जैसी घटनाएं शामिल थीं, जिसने उन्हें अपना देश छोड़ने पर मजबूर किया था।
शरणार्थी शिविरों में घटती फंडिंग और खाद्य संकट
वर्ष 2026 तक लगभग 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश में रह रहे हैं, जहां फंडिंग में भारी कमी के कारण स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। वर्ष 2026 की संयुक्त प्रतिक्रिया योजना के तहत बजट को घटाकर 710.5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है। इसके चलते विश्व खाद्य कार्यक्रम को मजबूरन मासिक खाद्य सहायता को घटाकर प्रति व्यक्ति मात्र 7 डॉलर करना पड़ा है। बांग्लादेश के शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मिजानुर रहमान ने बताया कि हर हफ्ते 50 से 60 शरणार्थी लगातार बांग्लादेश में प्रवेश कर रहे हैं। वर्ष 2024 की शुरुआत से लेकर अब तक, म्यांमार सेना और अराकान आर्मी के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से लगभग 150,000 लोग भागकर यहां आए हैं, जबकि अकेले जुलाई 2026 में समुद्र में लगभग 500 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर न्याय और सुरक्षा की गुहार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने समुद्र के रास्ते यात्रा करने के खतरों और स्थायी समाधानों की कमी का हवाला देते हुए वैश्विक स्तर पर नए सिरे से कदम उठाने की अपील की है। यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों सहित 16 कूटनीतिक मिशनों के एक गठबंधन ने जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित रखने का संकल्प लेते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इन मिशनों ने इस बात पर जोर दिया कि रखाइन राज्य में वर्तमान हालात, जो हवाई बमबारी, मानवीय नाकाबंदी और चल रहे गृहयुद्ध से प्रभावित हैं, सुरक्षित वापसी के लिए अनुकूल नहीं हैं। इस पूरी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb रिपोर्ट में दी गई है। म्यांमार के लिए विशेष सलाहकार परिषद और ब्लड मनी कैंपेन तथा प्रोग्रेसिव वॉयस जैसे नागरिक समाज संगठनों ने भी 2017 के अत्याचारों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने की मांग की है।