Russia Arctic Route: रूस के आर्कटिक रूट में भारत और चीन ने दिखाई गहरी दिलचस्पी, स्वेज नहर से 40 प्रतिशत कम होगी दूरी।

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने आर्कटिक क्षेत्र के उत्तरी समुद्री मार्ग यानी Northern Sea Route (NSR) के विकास के लिए भारत और चीन को अपने मुख्य साझेदार के रूप में चुना है। यह सामरिक गलियारा यूरोप और एशिया के बीच की समुद्री दूरी को बहुत कम करने का काम करेगा जिससे व्यापार में आसानी होगी।
रूस का बड़ा कदम और योजना
पैसिफिक फ्लीट के जवानों से बात करते हुए Vladimir Putin ने बताया कि यह नया समुद्री रास्ता स्वेज नहर के मुकाबले यात्रा की दूरी को करीब 40% तक कम कर सकता है। इस रास्ते पर साल भर जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए मास्को सरकार ने नेविगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और परमाणु ऊर्जा से चलने वाले आइसब्रेकर बेड़े पर भारी निवेश करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही रूस अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के नियमों का पालन करने पर पूरा जोर दे रहा है।
भारत की योजना और तैयारी
भारत के विदेश मंत्रालय ने रूस के साथ इस प्रोजेक्ट को लेकर चल रही बातचीत की पुष्टि की है। भारत इस कॉरिडोर को ऊर्जा कनेक्टिविटी और आपसी व्यापार को मजबूत करने का एक बहुत बड़ा अवसर मान रहा है। भारतीय नौवहन मंत्रालय के अधिकारी S. Venkatesapathy ने हाल ही में हुए आर्कटिक-रीजन फॉर्म में इस रूट के कमर्शियल फायदों के बारे में बताया था। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत साल 2027 में इस रूट से अपना पहला पायलट कार्गो जहाज भेजने की पूरी तैयारी कर रहा है।
चीन की गतिविधियां और चुनौतियां
दूसरी तरफ चीन लगातार इस रूट को अपनी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में शामिल कर रहा है। चीन की तरफ से इसी महीने से इस रास्ते पर नियमित शिपिंग सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई गई है। हालांकि इन सब के बीच राष्ट्रपति Vladimir Putin ने आर्कटिक क्षेत्र में NATO की बढ़ती मौजूदगी को लेकर कुछ भू-राजनीतिक चिंताएं भी व्यक्त की हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों एशियाई देश इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं।