Russia India Rail Link: रूस और भारत के बीच नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी, समुद्री जोखिमों से बचने के लिए बनेगा नया रास्ता।

रूस अब समुद्री रास्तों के जोखिमों से बचने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है और वह सेंट्रल तथा साउथ एशिया के रास्ते भारत तक एक नई रेलवे लाइन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य समुद्र में होने वाले व्यापारिक खतरों को कम करना और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों जैसे कि बॉस्फोरस और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर निर्भरता को घटाना है। रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर Marat Khusnullin ने लगभग 8-9 अगस्त 2026 को यह सार्वजनिक बयान दिया था कि रूस को हिंद महासागर तक रेल लिंक की संभावना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और भारत तक पहुँचने वाला हर विकल्प स्वीकार्य है।
जमीनी कॉरिडोर से व्यापार होगा आसान और तेज
यह जमीन आधारित कॉरिडोर रूस, सेंट्रल एशिया, ईरान और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच व्यापार के लिए एक छोटा, सस्ता और तेज लॉजिस्टिक्स मार्ग प्रदान करने का काम करेगा। हालांकि अभी तक किसी भी सीधी पैसेंजर सर्विस, टिकट की कीमत या लॉन्च की तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन प्रस्तावित कॉरिडोर तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजर सकते हैं। कजाकिस्तान और अजरबैजान भी मौजूदा ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का हिस्सा होने के कारण इसमें काफी महत्वपूर्ण हैं, जो आगे चलकर इंटरनेशनल नॉर्थ-SOUTH ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जुड़ सकते हैं।
INSTC और द्विपक्षीय बैठकों का दौर
यह इंटरनेशनल नॉर्थ-South ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC एक 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टीमॉडल नेटवर्क है जो रेल, सड़क और समुद्री मार्गों को आपस में जोड़ता है। इसे भारत, ईरान और रूस द्वारा वर्ष 2000 में स्थापित किया गया था और बाद में अन्य देश भी इसमें शामिल हो गए थे। यह मौजूदा कॉरिडोर एक मुख्य आधार है जिससे यह नया प्रस्तावित रेलवे जुड़ सकता है या इसका विस्तार किया जा सकता है। इसके अलावा 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस वर्किंग ग्रुप ऑन मॉडर्नाइजेशन एंड इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन के 12वें सत्र के दौरान दोनों देशों ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, भारत की वंदे भारत परियोजना और सिग्नलिंग सिस्टम समेत कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग की समीक्षा की थी।