सैन फ्रांसिस्को में गोल्डन गेट ब्रिज जाम करने वाले 7 फिलिस्तीन समर्थकों को हुई 30 दिन की जेल.

Praggya Singh sabal24 August 20263 min read68 viewsEnglish
सैन फ्रांसिस्को में गोल्डन गेट ब्रिज जाम करने वाले 7 फिलिस्तीन समर्थकों को हुई 30 दिन की जेल.

सैन फ्रांसिस्को में साल 2024 में गोल्डन गेट ब्रिज पर यातायात को रोकने वाले सात फिलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 30 दिन की जेल की सजा सुनाई है। शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को सुनाए गए इस फैसले के बाद इन सभी प्रदर्शनकारियों को सजा का सामना करना होगा, हालांकि अदालत ने उन्हें पहले से काटे गए समय के लिए 4 दिन की छूट भी दी है। इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद अब प्रवासियों और दुनिया भर के लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि किस तरह से विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून का पालन करना जरूरी होता है।

सजा और जुर्माने से जुड़े अन्य नियम

अदालत के आदेश के अनुसार इन सभी दोषियों को अपनी सजा का आधा हिस्सा काउंटी जेल में बिताना होगा, जबकि बचा हुआ समय सैन फ्रांसिस्को शेरिफ कार्यालय द्वारा चलाए जाने वाले वर्क रिलीज प्रोग्राम के जरिए पूरा किया जाएगा। इसके अलावा अदालत ने इन सभी पर 6 महीने की probation यानी परिवीक्षा अवधि भी लगाई है और साथ ही 1,000 डॉलर से अधिक का जुर्माना और मुआवजा भरने का भी आदेश दिया है। राहत की बात यह है कि ये सभी आरोपी अभी अपील लंबित रहने तक जमानत पर बाहर रह सकते हैं।

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किन मामलों में हुई सजा

इन सातों कार्यकर्ताओं की पहचान River Allen, Bhavika Anandpura, Sara Cantor, Rocky Chau, Conrad de Jesus, Sarah Ferrell और Em Tillotson के रूप में हुई है। इन्हें जुलाई 2026 में हुए मुकदमे के दौरान गैरकानूनी जमावड़े, रास्ते में बाधा डालने और झूठे कारावास जैसे कई misdemeanior यानी छोटे आपराधिक आरोपों में दोषी ठहराया गया था। सरकारी वकीलों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी तरह से उस felony conspiracy यानी गंभीर साजिश के आरोप में दोबारा मुकदमा नहीं चलाएंगे, जिसमें शुरुआती सुनवाई के दौरान जूरी किसी फैसले पर नहीं पहुंच पाई थी और उस गंभीर आरोप में अधिकतम 15 साल तक की सजा हो सकती थी।

अदालत और वकीलों का पक्ष

इस मामले की सुनवाई करने वाली सैन फ्रांसिस्को सुपीरियर कोर्ट की जज Teresa Caffese ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण विरोध या सविनय अवज्ञा करना एक बुनियादी अधिकार है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को अपने कृत्यों के लिए कानूनी परिणाम भुगतने ही होंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सजा किसी भी राजनीतिक विचार के आधार पर नहीं बल्कि केवल किए गए अपराधों के लिए दी गई है। सैन फ्रांसिस्को की जिला ATTORNEY Brooke Jenkins ने भी इस फैसले का समर्थन किया और कहा कि इस तरह के प्रदर्शनों से लोगों की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा होता है, इसलिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को हमेशा सार्वजनिक सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और बहुत सख्त करार दिया और कहा कि ये प्रदर्शनकारी गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी सरकार के समर्थन के खिलाफ अपनी नैतिक जिम्मेदारी के तहत आवाज उठा रहे थे। आपको बता दें कि ये सातों लोग कुल 26 लोगों के उस मूल समूह का हिस्सा थे जिन्हें 2024 के उस बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

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