सऊदी अरब और फ्रांस का बड़ा कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य नौवहन बहाल करने की मांग.

सऊदी अरब और फ्रांस ने मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 24 अगस्त 2026 को जारी एक संयुक्त बयान में दोनों देशों ने साफ कहा कि इस इलाके में समुद्री यातायात को तुरंत उस स्थिति में लाया जाए जैसा वह 28 फरवरी 2026 से पहले था। इस कड़े कूटनीतिक कदम से खाड़ी देशों में व्यापार और नौवहन से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वहां काम करने वाले तमाम भारतीय और अन्य प्रवासी इस रास्ते से होने वाली गतिविधियों पर निर्भर रहते हैं।
सामान्य स्थिति और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई उच्च स्तर की बैठकों के बाद यह बयान सामने आया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नौवहन की स्वतंत्रता की पूरी गारंटी होनी चाहिए और नियमित शिपिंग ट्रैफिक बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने किसी भी तरह के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क, टोल या ट्रांजिट प्रतिबंध लगाने के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना था कि ऐसे कोई भी नियम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ नहीं होने चाहिए ताकि कारोबारियों को परेशानी न उठानी पड़े।
ईरान के नए नियम और जहाजों पर कार्रवाई
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब ईरान के नए विनियामक निकाय फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGSA) ने जहाजों को प्रोटोकॉल उल्लंघन के नाम पर जुर्माने, हिरासत या जब्ती की धमकियां देना शुरू कर दिया। ईरानी संसद की एक समिति ने पर्यावरण सहायता, ईंधन भरने और नेविगेशन जैसी सेवाओं के नाम पर फीस वसूलने की योजना बनाई है। वर्तमान में ईरान ने ट्रांजिट नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सऊदी अरब की कंपनी बहरी (Bahri), यूएई की ADNOC Logistics and Shipping और Navig8 Tankers द्वारा संचालित जहाजों सहित कुल 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
वैश्विक चिंता और कूटनीतिक प्रयास
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि इस तरह महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को रोकने से वैश्विक स्तर पर भुखमरी का संकट और बढ़ रहा है जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। इस तनाव को देखते हुए अमेरिका ने तेहरान पर अपने दूसरे प्रतिबंधों को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र उस टास्क फोर्स को बढ़ावा दे रहा है जिसे मार्च में बनाया गया था ताकि पानी के इस रास्ते से उर्वरकों जैसी जरूरी मानवीय वस्तुओं की आवाजाही आसानी से हो सके। मैक्रोन और बिन सलमान ने ईरान से अपील की है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी IAEA के साथ पूरा सहयोग करे और अपने परमाणु कार्यक्रम का बातचीत से समाधान निकाले ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।