Saudi Arabia: सऊदी अरब ने बनाया नया नेवल गठबंधन, रियर एडमिरल अब्दुल्ला बिन सलेम अल-शेहरी संभालेंगे कमान

सऊदी अरब ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 6 अगस्त 2026 को रियर एडमिरल अब्दुल्ला बिन सलेम अल-शेहरी को नवगठित 'मल्टीनेशनल डिफेंसिव नेवल कोएलिशन' (Multinational Defensive Naval Coalition) का कमांडर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति इस गठबंधन को पूरी तरह से सक्रिय करने और इसकी परिचालन क्षमता को मजबूती देने के उद्देश्य से की गई है, ताकि समुद्री रास्तों पर आवाजाही सुरक्षित रहे।
गठबंधन का मुख्य लक्ष्य और तैयारी
इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन की घोषणा सबसे पहले 30 जुलाई 2026 को की गई थी। इसका मुख्य मकसद दुनिया भर में होने वाले समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह गठबंधन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर काम करेगा और इसका जोर प्रमुख जलडमरूमध्य (straits) और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा करने पर है। सऊदी एक्सपर्टाइज फोरम फॉर रिसर्च एंड स्टडीज के प्रमुख डॉ. अहमद अल-शेहरी ने 31 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया था कि यह कोई अस्थायी कदम नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक संस्थागत प्रोजेक्ट है।
कमांडर की जिम्मेदारी और गठबंधन का भविष्य
रियर एडमिरल अल-शेहरी अब संयुक्त रक्षा नौसेना कमान की देखरेख करेंगे। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में सदस्य देशों के बीच योजना बनाना, अन्य नौसैनिक गठबंधन के साथ मिलकर काम करना और चार्टर के मुताबिक मिशनों को पूरा करना शामिल है। यह एक खुला अंतरराष्ट्रीय गठबंधन है, जिसका अर्थ है कि दुनिया का कोई भी देश जो इन शांतिपूर्ण उद्देश्यों और सिद्धांतों पर सहमत है, वह इसमें शामिल हो सकता है।
वर्तमान में कई देश इस गठबंधन की आधिकारिक सदस्यता के लिए अपनी राष्ट्रीय प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसकी गतिविधियों को और गति देने के लिए 12 और 13 अगस्त 2026 को योजनाकारों की एक विशेष बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में गठबंधन की संस्थागत आवश्यकताओं को पूरा करने और नए समझौतों पर हस्ताक्षर करने पर चर्चा होगी, जिससे साफ है कि यह गठबंधन लगातार विस्तार की ओर अग्रसर है। प्रवासी भारतीयों और दुनिया भर के व्यापारियों के लिए यह एक राहत की खबर है, क्योंकि इससे समुद्री व्यापार मार्ग सुरक्षित होने की उम्मीद है जिससे सप्लाई चेन में रुकावट कम होगी।