Saudi Arabia News: सऊदी क्राउन प्रिंस और CENTCOM चीफ की हुई अहम बैठक, क्षेत्रीय सुरक्षा पर हुई लंबी चर्चा.

सऊदी अरब की राजधानी में क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने गुरुवार, 14 अगस्त 2026 को यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख Admiral Brad Cooper के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति बनाए रखने और तनाव को कम करने के उपायों पर खुलकर बात की। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में आपसी साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाना था, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता को और मजबूती मिल सके।
क्षेत्रीय रक्षा और समुद्री गठबंधन पर विशेष जोर
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखना बेहद जरूरी है। दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब सऊदी रक्षा मंत्रालय ने एक बड़े रक्षा कदम के तहत बहुराष्ट्रीय रक्षात्मक समुद्री गठबंधन की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की। इस पहल के तहत जेद्दा में तीसरी योजना बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें कुल 39 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और 13 देशों ने आधिकारिक तौर पर इस गठबंधन की सदस्यता ग्रहण की। इसके अलावा, CENTCOM ने पश्चिम एशिया में अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के मानवरहित सिस्टम को आपस में जोड़ने के लिए एक नई बहुराष्ट्रीय ड्रोन टास्क फोर्स "Task Force Falcon Strike" के गठन का भी ऐलान किया।
सुरक्षा चुनौतियां और नए अमेरिकी प्रतिबंध
इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद के हफ्तों में क्षेत्रीय सुरक्षा का माहौल काफी संवेदनशील बना रहा। 20 अगस्त 2026 को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी नजऱान क्षेत्र में स्थित एक हवाई अड्डे और एक अरामको सुविधा को निशाना बनाकर ड्रोन हमलों का दावा किया। इस बीच, अमेरिकी प्रशासन ने भी क्षेत्र में अपना दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने घोषणा की कि ईरान से जुड़ा संघर्ष अब आर्थिक दबाव के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। वहीं दूसरी ओर, ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने समन्वित आर्थिक अलगाव की नई रणनीति की जानकारी दी। इसी दिन अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी सरकार के समर्थन में गतिविधियों के चलते हिजबुल्लाह पर नए प्रतिबंध लगाते हुए उसे फिर से ब्लैकलिस्ट कर दिया। इन सभी घटनाओं से साफ है कि खाड़ी देशों और अमेरिका का पूरा ध्यान इस समय क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक रणनीतियों पर केंद्रित है।