Saudi Arabia Energy Tensions: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एनर्जी को लेकर बढ़ी तनातनी, तेल सप्लाई और डॉलर को लेकर हुई तीखी बहस

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रियाद के अधिकारियों के बीच हाल ही में ऊर्जा बाजार को लेकर एक तीखी झड़प की बात सामने आई है। इस गरमागरम बातचीत के दौरान अमेरिका और सऊदी अरब के पुराने रिश्तों और ऊर्जा के मामलों पर चर्चा हुई। हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि कौन से शब्द इस्तेमाल किए गए थे, लेकिन इस घटना ने दोनों देशों के बीच चल रही ऊर्जा संबंधी खींचतान को सबके सामने ला दिया है। इस पूरी स्थिति का असर आने वाले समय में ग्लोबल मार्केट और वहां काम करने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा और डॉलर को लेकर चेतावनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Donald Trump ने रियाद को चेतावनी दी थी कि अगर वे तेल की आपूर्ति में कटौती करते हैं या डॉलर के अलावा किसी और मुद्रा में व्यापार करते हैं, तो इससे देश की आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उनका यह भी कहना था कि ग्लोबल एनर्जी की शर्तें तय करने का हक अमेरिका के पास है। दूसरी तरफ, रियाद ने इस तरह की किसी भी धमकी को सिरे से खारिज कर दिया। सऊदी अधिकारियों का साफ कहना था कि उनका देश किसी के दबाव में नहीं आता, बल्कि वह अपने संप्रभु हितों के हिसाब से फैसले लेता है और अपनी खुद की कीमत तय करने की नीति पर काम करता है।
तेल आयात और उत्पादन में बड़े बदलाव
यह जुबानी जंग ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में एनर्जी का नक्शा तेजी से बदल रहा है। 7 अगस्त 2026 को सामने आए आंकड़ों से पता चला कि सऊदी अरब से अमेरिका होने वाला तेल आयात गिरकर शून्य पर पहुंच गया। ऐसा साल 1985 के बाद पहली बार हुआ है। इसके साथ ही, ओपेक प्लस (OPEC+) गठबंधन, जिसमें सऊदी अरब और रूस जैसे बड़े देश शामिल हैं, ने घोषणा की कि वे साल 2026 तक ग्लोबल डेली ऑयल प्रोडक्शन में 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी करेंगे।
भू-राजनीतिक स्थिति और मिडिल ईस्ट का रुख
भू-राजनीतिक हालात अभी भी लगातार बदल रहे हैं। 8 अगस्त 2026 को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने घोषणा की कि प्रशासन घरेलू पेट्रोल की कीमतों को नीचे लाने के लिए मिडिल ईस्ट में तेल का उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, कूटनीतिक सहयोग लगातार क्षेत्रीय सैन्य नीतियों को भी प्रभावित कर रहा है। इसका उदाहरण 3 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स में देखने को मिला, जिसमें बताया गया कि डोनाल्ड ट्रम्प ने खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब के सीधे आग्रह के बाद ईरान पर होने वाले नियोजित हमलों को रोक दिया था। इन सभी घटनाओं से साफ है कि खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीति और ऊर्जा का खेल काफी दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है।