Saudi Arabia पर मंडराया खतरा, ईरान समर्थित समूहों के बड़े हमले की साजिश का हुआ खुलासा

सऊदी अरब के एक जिम्मेदार सूत्र ने 6 अगस्त 2026 को एक बेहद अहम जानकारी साझा की है, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, यमन के हुती विद्रोहियों, इराक में सक्रिय मिलिशिया और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच सऊदी अरब को निशाना बनाने के लिए एक साजिश रची गई थी। इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है क्योंकि सऊदी अरब इन दिनों क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की कोशिशों में जुटा है।
लगातार हो रहे हैं हमले और सुरक्षा चुनौतियां
सऊदी अरब पर हमलों की यह घटना कोई अकेली नहीं है। 6 अगस्त 2026 को ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने यह जानकारी दी कि पिछले 72 घंटों के अंदर 30 से ज्यादा ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों के लिए उन मिलिशिया को जिम्मेदार माना जा रहा है जो ईरान से निर्देश लेते हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसे काफी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इन हमलों को रोकने के लिए सऊदी और अमेरिकी वायु सेना को संयुक्त रूप से काम करना पड़ा है।
इससे पहले 27 जुलाई 2026 को सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इराक की ओर से आए ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया था। ये ड्रोन सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र और रियाद में तेल की सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। सऊदी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इराक से यह मांग की है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल सऊदी अरब के खिलाफ न होने दे।
पानी के रास्तों पर भी बढ़ा है खतरा
केवल जमीन ही नहीं बल्कि समुद्र में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हुती मिलिशिया के प्रवक्ता याह्या सारे ने 5 अगस्त 2026 को दावा किया कि उन्होंने लाल सागर और अदन की खाड़ी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों वाफा और डेज़ी को निशाना बनाया है। हालांकि सऊदी अरब की ओर से इन हमलों की पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद Lloyd's List Intelligence की रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक हफ्ते में होर्मुज जलडमरूमध्य में कम से कम दो जहाज हमले का शिकार हुए हैं।
कूटनीति और सुरक्षा के बीच सऊदी का रुख
भू-राजनीतिक विश्लेषक सलमान अल-अंसारी ने इस स्थिति पर बात करते हुए कहा कि सऊदी अरब ईरान की आक्रामकता का विरोध तो करता है, लेकिन वह किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध के पक्ष में नहीं है। सऊदी नेतृत्व इस समय बातचीत और कूटनीति के साथ-साथ अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ओमान के साथ समझौते का संकेत दिया है, लेकिन साथ ही ईरान ने 6 अगस्त 2026 को खाड़ी देशों को चेतावनी भी दी है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमले बंद नहीं करेगा, तो वे खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएंगे।
फिलहाल, सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह अपनी रक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है। वहां रह रहे प्रवासियों और काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने वाली है, हालांकि प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए काम कर रहा है।