Hormuz Strait: सऊदी अरब और फ्रांस का कड़ा रुख, ईरान के नए नियमों को नकारा और मांगी खुली नेविगेशन

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में दोनों बड़े नेताओं ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही पर किसी भी तरह की रोकटोक को तुरंत हटाने की मांग की है। यह महत्वपूर्ण घोषणा क्राउन प्रिंस की फ्रांस की दो दिवसीय राजकीय यात्रा के समापन के बाद सामने आई है, जो 23 अगस्त से 24 अगस्त 2026 के बीच हुई थी। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि पानी के रास्ते होने वाले व्यापार पर किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए और समुद्री ट्रैफिक को अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक पूरी तरह सामान्य किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हुए हालिया हमलों और समुद्री सुरक्षा को मिल रही धमकियों की कड़ी निंदा की है।
ईरान द्वारा नए प्राधिकरण का गठन और शुल्क की तैयारी
दूसरी तरफ, इस जलमार्ग के आसपास का माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी 24 अगस्त 2026 को ईरान ने गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी नाम से एक नए नियामक निकाय यानी रेगुलेटरी बॉडी के गठन का ऐलान किया है। इस नई संस्था ने समुद्री हलचल को और ज्यादा नियंत्रित करने की अपनी योजना साफ कर दी है। अथॉरिटी की तरफ से कहा गया है कि सभी जहाजों को ईरान के बनाए गए नियमों का पालन करना होगा, वरना उन्हें भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है, जहाजों को हिरासत में लिया जा सकता है या फिर उनका सामान भी जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा, इस निकाय ने यह भी चेतावनी दी है कि जो जहाज नियमों का पालन न करने वाले अन्य जहाजों के साथ सामान का लेन-देन करेंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इस समय ईरान नौवहन, पर्यावरण सुरक्षा, बीमा और सेफ्टी सेवाओं से जुड़े खास शुल्कों को लागू करने पर विचार कर रहा है, जिससे इस रास्ते से गुजरने वाली कंपनियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अमेरिका की सख्ती
सऊदी प्रिंस और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने अपने इस साझा बयान में ईरान से जुड़ी अन्य बड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ पूरा सहयोग करने पर जोर दिया। मौजूदा हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं, खासकर फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद से यह जलमार्ग कुछ समय के लिए बंद हो गया था, जिससे दुनिया भर के व्यापार को बहुत बड़ा झटका लगा था। इन ताजा तनावों का जवाब देते हुए अमेरिका ने शिपिंग में किसी भी तरह की दखलअंदाजी को रोकने के लिए ईरान पर अपने माध्यमिक प्रतिबंधों को और बढ़ा दिया है। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने से बचने के लिए नियमों का पालन करने की एक सख्त समयसीमा तय कर दी है।
गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
इस बैठक के दौरान सऊदी और फ्रांस के नेताओं ने व्यापक क्षेत्रीय संकट और गाजा में चल रहे संघर्ष पर भी विस्तार से बातचीत की। उन्होंने गाजा में स्थायी संघर्ष विराम के लिए सही हालात पैदा करने पर अपना समर्थन जताया। इसके साथ ही, हमास के हथियारों को छोड़ने से जुड़े समझौते का स्वागत किया और इजराइल की बस्तियों से जुड़ी नीतियों को तुरंत बंद करने की सामूहिक मांग की। इस पूरे घटनाक्रम का असर उन सभी देशों और कारोबारियों पर पड़ रहा है जो इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें भारत जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापारिक रूट और लॉजिस्टिक्स पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है क्योंकि खाड़ी देशों के साथ भारत के व्यापार का बड़ा हिस्सा समंदर के रास्ते ही होता है।