सऊदी अरब और फ्रांस का बड़ा कदम, हमास के हथियार छोड़ने और गाजा में मदद पहुंचाने के समझौते का किया स्वागत

सऊदी अरब और फ्रांस ने मिलकर गाजा में शांति स्थापित करने और मानवीय सहायता पहुंचाने को लेकर एक बड़ा संयुक्त बयान जारी किया है। 24 अगस्त 2026 को जारी इस आधिकारिक बयान में दोनों देशों ने हमास आंदोलन के हथियार छोड़ने से जुड़े समझौते का स्वागत किया। इस संयुक्त कूटनीतिक पहल की शुरुआत पेरिस में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद हुई है। इस संबंध में पूरी जानकारी Saudi Press Agency (SPA) पर साझा की गई है।
क्षेत्रीय स्थिरता और फिलिस्तीन मुद्दे पर चर्चा
दोनों देशों के नेताओं ने आपसी बातचीत के दौरान मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति बनाए रखने के कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। इस दौरान इस्राइल द्वारा बस्तियां बसाने के काम को रोकने की मांग की गई और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश बनाने के अपने पुराने रुख को फिर से दोहराया गया। सऊदी अरब और फ्रांस ने अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का फैसला किया है जिसके तहत रक्षा, ऊर्जा, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा।
ईरान और अन्य क्षेत्रीय तनावों पर रुख
बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया गया और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने की बात कही गई। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए समुद्र में आने-जाने की स्वतंत्रता को बहाल करने की मांग की गई। लेबनान की संप्रभुता बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को लागू करने की वकालत की गई और यमन में प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को समर्थन देने की बात कही गई।
समझौते को लागू करने में चुनौतियां
हालांकि दोनों देश शांति और कूटनीति की बात कर रहे हैं लेकिन इस समझौते को जमीन पर उतारना आसान नहीं दिख रहा है। 23 अगस्त 2026 को इस्राइली प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने इस समझौते को लेकर अपनी गंभीर सुरक्षा चिंताएं जाहिर कीं। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का साफ कहना है कि जब तक ह पूरी तरह से हथियार नहीं छोड़ देता तब तक इस्राइल गाजा से अपनी सेना वापस नहीं बुलाएगा।