Saudi-Iraq News: सऊदी और इराक के बीच बढ़ी नजदीकी, सुरक्षा को लेकर जल्द होगी बड़ी बैठक

सऊदी अरब और इराक के बीच सुरक्षा और आपसी सहयोग को लेकर एक अहम चर्चा हुई है। 5 अगस्त 2026 को जॉर्डन के अम्मान में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और इराक के विदेश मंत्री फुअद हुसैन के बीच मुलाकात हुई। यह बैठक जेरूसलम के समर्थन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच भविष्य के सुरक्षा रिश्तों को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।
सुरक्षा पर विशेष चर्चा और बैठक की तैयारी
इस बैठक का मुख्य एजेंडा इराक से एक सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल की सऊदी अरब आने वाली यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देना था। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि इराक की जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ हमले करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सऊदी अरब और इराक ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने और अरब व इस्लामिक देशों के साथ एकता बनाए रखने का संकल्प लिया है।
तनाव के बाद वापसी का रास्ता
क्षेत्र में हाल ही में तनाव का माहौल बना था, खासकर 29 जुलाई 2026 को सऊदी और अमेरिकी बलों द्वारा इराक में Popular Mobilization Forces (PMF) के ठिकानों पर की गई स्ट्राइक के बाद। इस घटनाक्रम ने इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की प्रस्तावित सऊदी यात्रा को टालने पर मजबूर कर दिया था। हालांकि, अब हालात सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने 1 अगस्त 2026 को आपातकालीन सुरक्षा उपाय लागू किए थे, जिसमें सीमा पार से होने वाली किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए एक संयुक्त सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश दिया गया था।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि इराक के प्रधानमंत्री अगले हफ्ते सऊदी अरब का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और निवेश जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होगी। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बने रहने से व्यापार और आवागमन सुचारू रहता है। भारत से बड़ी संख्या में लोग इन दोनों देशों में काम करते हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा सीधे तौर पर उनके सुरक्षित माहौल और भविष्य के अवसरों से जुड़ी होती है। दोनों देशों के बीच यह तालमेल भविष्य में निवेश के नए दरवाजे भी खोल सकता है जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।