सऊदी अरब ने जारी किया नया निर्देश, डिजिटल विज्ञापनों में डेटा शेयर करने से पहले रहें सावधान.

Aanya21 August 20262 min read54 viewsSaudi
सऊदी अरब ने जारी किया नया निर्देश, डिजिटल विज्ञापनों में डेटा शेयर करने से पहले रहें सावधान.

सऊदी अरब में रहने वाले लोगों और प्रवासियों के लिए ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी से बचने को लेकर एक जरूरी चेतावनी सामने आई है। सऊदी मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी ने 21 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है जिसमें लोगों से कहा गया है कि वे किसी भी डिजिटल विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसके स्रोत की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें। इस चेतावनी का मुख्य मकसद आम जनता को अनजान और गैर-भरोसेमंद लोगों के साथ अपनी निजी जानकारी साझा करने से रोकना है ताकि किसी भी तरह के बड़े खतरे या धोखे से बचा जा सके।

सऊदी अरब का मजबूत डेटा सुरक्षा कानून

सऊदी अरब में नागरिकों और प्रवासियों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं जिन्हें पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन लॉ यानी PDPL कहा जाता है। यह कानून पूरी तरह से सितंबर 2024 में लागू हुआ था और इसके तहत सभी कंपनियों और संस्थानों को डेटा सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है। इस कानून को लागू कराने की मुख्य जिम्मेदारी सऊदी डेटा एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अथॉरिटी यानी SDAIA के पास है। साल 2026 की शुरुआत तक SDAIA ने डेटा गोपनीयता नियमों का उल्लंघन करने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कुल 48 औपचारिक फैसले जारी किए हैं।

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नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और सजा

यदि कोई कंपनी या संस्थान PDPL के नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नियमों का उल्लंघन करने पर प्रत्येक मामले में 5 मिलियन सऊदी रियाल यानी SAR 5 million तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति या कंपनी बार-बार यही गलती करती है तो यह जुर्माना दोगुना भी किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर कोई जानबूझकर किसी की निजी और संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामले के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है और जेल की सजा भी हो सकती है।

ई-कॉमर्स विज्ञापनों के लिए पारदर्शिता जरूरी

सऊदी अरब में डिजिटल विज्ञापनों का संचालन करने के लिए ई-कॉमर्स लॉ लागू किया गया है। इस कानून के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि स्पॉन्सर्ड कंटेंट या विज्ञापनों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि ग्राहकों को यह साफ-साफ पता चल सके कि कौन सा विज्ञापन प्रायोजित है। साथ ही, इस कानून में स्थापित ऑप्ट-आउट मेकैनिज्म के जरिए आम उपभोक्ताओं के अधिकारों की पूरी सुरक्षा की जाती है ताकि लोग अपनी मर्जी के मुताबिक विज्ञापनों से दूरी बना सकें। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासी जब भी ऑनलाइन खरीदारी करें या सोशल मीडिया पर किसी विज्ञापन को देखें, तो उन्हें अपनी पर्सनल जानकारी देने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

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