Saudi Arabia: प्रोजेक्ट मैसम ने यमन में एक हफ्ते में साफ किए 1836 विस्फोटक, आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम.

सऊदी अरब की तरफ से चलाए जाने वाले बारूदी सुरंग सफाई अभियान Project Masam ने यमन में एक बार फिर बड़ा काम किया है। आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट ने 15 अगस्त से 21 अगस्त 2026 के बीच यमन के अलग-अलग इलाकों से कुल 1,836 खतरनाक विस्फोटक चीजों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। इन खतरनाक हथियारों और विस्फोटकों के हटने से वहां के आम नागरिकों को बहुत बड़ी राहत मिली है, जो रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर जीने को मजबूर थे।
इस एक हफ्ते के अभियान के दौरान प्रोजेक्ट की टीम ने कुल 13 एंटी-पर्सनल माइंस, 25 एंटी-टैंक माइंस, 1,792 बिना फटे हुए बम जिन्हें UXO कहा जाता है, और 6 आईईडी यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस को पूरी तरह से नष्ट किया। इस तरह की खतरनाक चीजें यमन के सामान्य नागरिकों और बच्चों के लिए हर वक्त मौत बनकर मंडराती रहती हैं, जिन्हें समय पर हटाने से बड़ा खतरा टल गया है।
कितनी जमीन को किया गया सुरक्षित
सऊदी अरब के इस प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ विस्फोटक ही नहीं हटाए गए, बल्कि बहुत बड़े हिस्से को बिल्कुल सुरक्षित भी बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस एक हफ्ते के दौरान 355,679 वर्ग मीटर जमीन को पूरी तरह साफ किया गया ताकि वहां के लोग बिना किसी डर के आ-जा सकें और खेती या अन्य जरूरी काम कर सकें। इस बारे में पूरी जानकारी Saudi Press Agency (SPA) की आधिकारिक रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें बताया गया कि ये सारे काम किंग सलमान ह्यूमैनिटेरियन एड एंड रिलीफ सेंटर यानी KSrelief की देखरेख में किए जा रहे हैं।
यह राहत अभियान यमन के कई प्रमुख गवर्नरेट में चलाया गया जिसमें Aden, Al Dhale, Al Hudaydah, Hadramawt, Hajjah, Lahj, Marib, Shabwah और Taiz जैसे इलाके शामिल हैं। अगस्त 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक इस प्रोजेक्ट ने कुल 9,280 विस्फोटक खतरों को जमीन से निकालकर नष्ट कर दिया है, जो एक बहुत बड़ा आंकड़ा है।
साल 2018 से लगातार जारी है यह अभियान
आपको बता दें कि यह प्रोजेक्ट साल 2018 के बीच से लगातार काम कर रहा है और तब से लेकर अब तक Project Masam ने कुल 587,506 से ज्यादा विस्फोटक खतरों को खत्म किया है। इसके अलावा टीम ने अब तक कुल 84,734,060 वर्ग मीटर जमीन को पूरी तरह से सुरक्षित और साफ कर दिया है। यह सारा काम अंतरराष्ट्रीय मानकों यानी International Mine Action Standards (IMAS) के हिसाब से किया जाता है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उनका मुख्य मकसद यमन के आम लोगों की जिंदगी को सुरक्षित बनाना और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन देना है।