Saudi SFDA: सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी ने मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए ZENBEXUS को दी मंजूरी, दुनिया में बना पहला देश.

सऊदी अरब ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है और दुनिया भर में पहला देश बन गया है जिसने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए एक नई दवा को मंजूरी दी है। सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी यानी SFDA ने मल्टीपल मायलोमा के मरीजों के लिए ZENBEXUS (iberdomide) नाम की दवा के रजिस्ट्रेशन को हरी झंडी दे दी है। यह दवा खून के कैंसर से जूझ रहे वयस्क मरीजों के लिए इस्तेमाल की जाएगी और इसे डाराटुमumab और डेक्सामाथासोन के साथ मिलाकर दिया जाएगा। इस बड़ी उपलब्धि से सऊदी अरब ने यह साबित कर दिया है कि वह मेडिकल इनोवेशन के मामले में दुनिया में सबसे आगे निकल रहा है और अपने यहां के लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले प्रवासियों को भी बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मल्टीपल मायलोमा बीमारी और ZENBEXUS दवा का काम करने का तरीका
मल्टीपल मायलोमा असल में एक तरह का खून का कैंसर होता है जो हड्डियों के मज्जा यानी बोन मैरो के प्लाज्मा सेल्स में शुरू होता है। इस बीमारी की वजह से शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो जाता है, सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या घट जाती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बहुत कमजोर हो जाती है, किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और हड्डियां भी कमजोर होकर टूटने लगती हैं। नई दवा ZENBEXUS को पहले ही SFDA के ब्रेकथ्रू मेडिसिन प्रोग्राम के तहत रखा गया था। यह दवा सेरेब्लन ई3 लिगेज मॉड्यूलेटर यानी CELMoD एजेंट नामक आधुनिक क्लास से ताल्लुक रखती है। यह दवा उन प्रोटीनों को खत्म करने का काम करती है जो मायलोमा सेल्स को जिंदा रहने और बढ़ने में मदद करते हैं, और साथ ही यह शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करती है ताकि वह इन कैंसर सेल्स से मुकाबला कर सके।
क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे और मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां
सऊदी अथॉरिटी द्वारा दी गई यह मंजूरी एक बड़े फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल के सकारात्मक नतीजों के आधार पर दी गई है, जिसमें रिलैप्स या रिफ्रैक्टरी मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित मरीजों को शामिल किया गया था। इस ट्रायल में यह बात सामने आई कि जब इबेरडोमाइड को डाराटुमumab और डेक्सामाथासोन के साथ मिलाकर दिया गया, तो मरीजों की सेहत में काफी सुधार देखा गया। हालांकि, इस इलाज के दौरान कुछ साइड इफेक्ट्स या रिएक्शन भी सामने आ सकते हैं, जैसे कि खून की कुछ कोशिकाओं में कमी होना जिससे इंफेक्शन या एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है, इसके अलावा चक्कर आना, मितली आना और शरीर पर चकत्ते पड़ना भी शामिल है।
डॉक्टरों की देखरेख में होगा इलाज और विजन 2030 का लक्ष्य
SFDA ने इस बात पर खास जोर दिया है कि ZENBEXUS दवा का इस्तेमाल हमेशा किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। मरीजों की सेहत की स्थिति और उनके खून की जांच के नतीजों की नियमित निगरानी करना जरूरी है, और यह सब दवा के साथ मिलने वाले पर्चे के नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। यह फैसला SFDA की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत वे स्वास्थ्य सेवाओं में नए बदलाव और आधुनिक इलाज के तरीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। सऊदी अरब सरकार का यह कदम हेल्थ सेक्टर ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम और Saudi Vision 2030 के लक्ष्यों के बिल्कुल मेल खाता है, जिससे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अधिक बेहतर हो रही है।