Red Sea में Saudi के Tanker पर मिसाइल से हमला, मची अफरातफरी लेकिन टला बड़ा नुकसान.

Nura Basta25 August 20263 min read64 viewsSaudi
Red Sea में Saudi के Tanker पर मिसाइल से हमला, मची अफरातफरी लेकिन टला बड़ा नुकसान.

लाल सागर यानी Red Sea में एक बार फिर बड़ा समुद्री हमला हुआ है, जिससे सऊदी अरब की समुद्री सीमा के पास खलबली मच गई है। Monday, August 24, 2026 को सऊदी अरब के झंडे वाले बहुत बड़े क्रूड कैरियर टैंकर Amzan को एक प्रोजेक्टाइल यानी मिसाइल से निशाना बनाया गया। यह जहाज शिपिंग कंपनी Bahri द्वारा संचालित किया जाता है और घटना के समय लाल सागर में सफर कर रहा था। इस खतरनाक हमले के बाद जहाज के मुख्य डेक पर भीषण आग लग गई, जिससे चालक दल और समुद्री सुरक्षा अधिकारियों में तुरंत हड़कंप मच गया। हालांकि गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे में किसी भी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई और सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

यूकेएमटीओ और बहरी कंपनी का आधिकारिक बयान

इस पूरे मामले की जानकारी सबसे पहले United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने दी। यूकेएमटीओ की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला सऊदी अरब के प्रसिद्ध बंदरगाह शहर Yanbu से लगभग 63 nautical miles पश्चिम में हुआ। हमले के तुरंत बाद पोत संचालिका कंपनी Bahri ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए पुष्टि की कि जहाज पर सवार सभी कर्मचारी पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, इस घटना से समुद्री पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है, जो कि एक बड़ी राहत की खबर है। कंपनी लगातार क्रू मेंबर के संपर्क में है और संबंधित समुद्री अधिकारियों के साथ मिलकर जहाज को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।

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हूती विद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी

इस हमले के कुछ ही देर बाद यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने सामने आकर इस घटना की जिम्मेदारी ले ली। हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने सऊदी अरब के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत इस जहाज को निशाना बनाने के लिए एक बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह हमला काफी सटीक था जिसके कारण जहाज में आग भड़क उठी। इस घटना के बाद आसपास के इलाके से गुजर रहे अन्य जहाजों को भी अपनी दिशा बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके अलावा, हूती प्रवक्ता ने पूर्वी यमन में सैन्य ठिकानों पर दो अन्य अलग अभियानों को अंजाम देने का भी दावा किया है, हालांकि इनकी पुष्टि अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं हो पाई है।

यान्बू बंदरगाह और तेल आपूर्ति पर असर

वर्ष 2014 में बना यह 320,926-dwt का विशाल टैंकर ऐसे समय में निशाना बना है जब हूती हमलों की वजह से यान्बू पोर्ट का कामकाज पहले ही प्रभावित हो रहा है। आपको बता दें कि यान्बू बंदरगाह सऊदी अरब के लिए कच्चे तेल के निर्यात का एक बहुत ही महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग है। जब से हूती संगठन ने July 20 को सऊदी बंदरगाहों के ट्रैफिक पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, तब से यान्बू में टैंकरों की आवाजाही में एक तिहाई से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा के खतरों से निपटने के लिए सऊदी अरब ने अब अपने वीएलसीसी कार्गो को उत्तर दिशा की ओर लाल सागर के रास्ते भेजना शुरू कर दिया है। इन जहाजों को मिस्र के Ain Sukhna में आंशिक रूप से खाली किया जाता है और फिर सिदी केरीर में Sumed pipeline के जरिए दोबारा लादकर स्वेज नहर से आगे रवाना किया जाता है।

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