Saudi, Turkey और Pakistan के बीच हुआ ऐतिहासिक रक्षा समझौता, अब तीनों देश साथ मिलकर करेंगे सुरक्षा

Sushma Kumari8 August 20262 min read62 viewsSaudi
Saudi, Turkey और Pakistan के बीच हुआ ऐतिहासिक रक्षा समझौता, अब तीनों देश साथ मिलकर करेंगे सुरक्षा

सऊदी अरब के विभिन्न हिस्सों में शनिवार, 8 अगस्त 2026 को एक खास नजारा देखने को मिला, जब वहां की बड़ी इमारतों और टावरों को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के राष्ट्रीय झंडों से रोशन किया गया। यह रोशनी मक्का में हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Makkah Joint Defence Agreement) पर हस्ताक्षर करने की खुशी में की गई थी। यह प्रदर्शन तीनों देशों के बीच सदियों पुराने गहरे संबंधों, आपसी भाईचारे और रणनीतिक सहयोग को दुनिया के सामने लाने का एक जरिया बना।

समझौते की मुख्य बातें

यह महत्वपूर्ण समझौता शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को मक्का में आधिकारिक रूप से साइन किया गया। समझौते के नियमों के अनुसार, अगर इन तीनों देशों में से किसी एक पर भी कोई बाहरी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यानी कि अब ये तीनों देश एक-दूसरे की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

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नेताओं का बयान

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बताया कि यह समझौता तीनों देशों के बीच की गहरी रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एक बड़ा कदम है। वहीं, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने कहा कि यह रक्षा साझेदारी भविष्य में सुरक्षा, तालमेल और समन्वय को मजबूत करने का काम करेगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शेहबाज शरीफ ने इस समझौते को शांति की ढाल बताया और इसे विश्वास तथा दोस्ती का प्रतीक करार दिया।

तुर्की के अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक है और किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि यह समझौता तुर्की के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन, जैसे कि NATO के नियमों के अनुरूप ही है। दूसरी ओर, सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति के उप मंत्री रायद क्रीमली ने स्पष्ट किया कि इस समझौते का मकसद कोई सैन्य गुट या विशेष संप्रदाय का समूह बनाना नहीं है, और न ही इसका संबंध परमाणु हथियारों या हथियारों की होड़ से है।

यह समझौता मक्का में आयोजित 'मक्का अल-मुकर्रमह समिट फॉर जॉइंट डिफेंस' के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शरीफ के बीच संपन्न हुआ। इस बड़े बदलाव का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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