Saudi Arabia, Turkey और Pakistan ने किया बड़ा समझौता, Mecca में साइन हुआ 'Joint Defense Pact'

Aanya7 August 20263 min read53 viewsSaudi
Saudi Arabia, Turkey और Pakistan ने किया बड़ा समझौता, Mecca में साइन हुआ 'Joint Defense Pact'

सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने मिलकर एक ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे 'मक्का एग्रीमेंट फॉर जॉइंट डिफेंस' के नाम से जाना जाएगा। यह महत्वपूर्ण समझौता 7 अगस्त 2026 को पवित्र शहर मक्का के अल-सफा पैलेस में संपन्न हुआ। इस शिखर सम्मेलन में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भाग लिया और इस ऐतिहासिक संधि पर अपनी सहमति दी। यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

समझौते का मुख्य आधार

इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें शामिल तीनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली है। समझौते के अनुसार, यदि इन तीन देशों में से किसी एक पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ हमला माना जाएगा। इस पहल का प्राथमिक लक्ष्य आपस में रक्षा सहयोग को बढ़ाना और किसी भी प्रकार के बाहरी आक्रामक रुख के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध तैयार करना है। तुर्किए के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह समझौता सैन्य अभ्यास, तकनीक साझा करने, सैनिकों के प्रशिक्षण और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान में मदद करेगा।

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तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने स्पष्ट किया कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसे किसी खास देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस रास्ते को अन्य क्षेत्रीय देशों के लिए भी खुला रखा गया है ताकि वे भी सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में शामिल हो सकें।

सुरक्षा परिदृश्य और ईरान के साथ तनाव

यह सुरक्षा समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल गहराया हुआ है। विशेष रूप से फरवरी 2026 में ईरान के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद से सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी पृष्ठभूमि में, सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में पाकिस्तान के साथ पहले ही एक सामरिक रक्षा समझौता किया था, जिसे अब इस त्रिपक्षीय समझौते के साथ और भी व्यापक रूप दे दिया गया है।

सऊदी अरब के उप मंत्री रयेद क्रिमली ने इस विषय पर सफाई देते हुए कहा कि यह किसी तरह का सैन्य गुट या सांप्रदायिक समूह नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका संबंध परमाणु महत्वाकांक्षा या हथियारों की होड़ से नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल सदस्य देशों की रक्षा क्षमताओं को टिकाऊ बनाना है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे सामूहिक प्रतिरोध के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इसे इस्लामी दुनिया में सुरक्षा और सहयोग बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक पहल कहा है। हालांकि, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के एक सदस्य ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि बाहरी समझौतों पर निर्भर रहना रियाद के लिए सुरक्षा का कोई स्थायी रास्ता नहीं बनेगा। भारत और अन्य देशों में रह रहे प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि यह खाड़ी क्षेत्र के बदलते सुरक्षा समीकरणों को दर्शाता है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापार पर पड़ता है।

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