Strait of Hormuz Blockade: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में तनाव से कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के पार, खाड़ी देशों में चिंता बढ़ी.

दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल देखा गया है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। वैश्विक बाजार में 11 अगस्त 2026 को तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है, जिसके बाद West Texas Intermediate (WTI) फ्यूचर्स का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। वहीं Brent crude भी लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। यह लगातार दूसरा दिन था जब तेल के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई, क्योंकि इसके एक दिन पहले ही क्रूड कॉन्ट्रैक्ट्स में करीब 5 प्रतिशत का उछाल आया था। इस अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को लेकर गहराता संकट और कूटनीति के जरिए मामले के जल्द सुलझने की उम्मीदों का धूमिल होना है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को लेकर क्यों बढ़ा तनाव
खाड़ी क्षेत्र में तनाव तब और ज्यादा बढ़ गया जब ईरान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पहले जैसे हालात में वापस नहीं लौटेगा। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य का यह मौजूदा नाकाबंदी संकट किसी भी कूटनीतिक बातचीत के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता है। बीते दिन यानी 10 अगस्त को ईरानी सांसदों ने एक नया बिल आगे बढ़ाया है, जिसमें इस रास्ते से अमेरिका, इस्राइल और अन्य शत्रु देशों के स्वामित्व वाली संपत्तियों और उपकरणों के आने-जाने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह घटनाक्रम उसी दिन सामने आया जब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की सरकारी तेल कंपनी से जुड़े एक कैरियर पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने के दौरान कथित तौर पर हमला किया गया था। इस हमले के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं।
ईरान और अमेरिका की मांगें और ओमान की मध्यस्थता
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohammad Bagher Zolghadr ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को दोबारा खोलने के लिए अपनी तरफ से कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं। उनकी मांगों में ईरान के सर्वोच्च नेता के खिलाफ धमकियों को बंद करना, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर हमेशा के लिए रोक लगना, अमेरिकी नौसेना और वायु सेना की वापसी, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को मुक्त करना शामिल है। इसके विपरीत, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने शांति वार्ताओं के तहत ईरान से युद्ध मुआवजे की मांग की है और साथ ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा भी किया है। इस बीच, ओमान इस रास्ते से अस्थायी नौवहन गलियारे के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है और शुरुआती बातचीत को सकारात्मक बता रहा है, लेकिन ईरान का कहना है कि इस जलमार्ग को लेकर उसका आदेश अभी भी पूरी तरह लागू है।
मार्केट एक्सपर्ट्स और ग्लोबल इकोनॉमी पर असर
दुनियाभर के बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अटकी बातचीत और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ही तेल के दामों में इस भारी उछाल की मुख्य वजह है। Capital.com, GivTrade और SEB जैसे वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों ने इस बात की पुष्टि की है। इसके अलावा, Rystad Energy ने भी बाजार की इस स्थिति पर चिंता जताई है क्योंकि ईरान की तरफ से ट्रांजिट शर्तों को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, उसमें शत्रु देशों पर टोल लगाना और चुनिंदा जहाजों को बैन करना शामिल है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की आपूर्ति और ज्यादा प्रभावित हो सकती है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए भी इस तरह की घटनाएं भविष्य में महंगाई और यात्रा खर्चों पर असर डाल सकती हैं।