Strait of Hormuz Update: ईरान ने साफ किया, अमेरिकी नीतियों में बदलाव तक बंद रहेगा हॉर्मूज जलडमरूमध्य.

फारस की खाड़ी में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया भर के देशों की नजरें इस रास्ते पर टिकी हुई हैं। ईरान के शीर्ष सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि Strait of Hormuz अभी भी बंद है और इसे तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक अमेरिका अपने रवैये में बड़ा बदलाव नहीं लाता और अपने पुराने वादों को पूरा नहीं करता। इस पूरी स्थिति का असर आम व्यापार और तेल की आवाजाही पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
ईरान की दो टूक और अमेरिका की तैयारी
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने चेतावनी दी है कि यदि आर्थिक प्रतिबंधों का दौर जारी रहा, तो तेहरान फारस की खाड़ी से होने वाले सभी तेल निर्यात को पूरी तरह से रोक देगा। उन्होंने कहा कि देश को केवल मौखिक बयानों की जगह ठोस कदमों की जरूरत है। संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने भी दोहराया कि यह समुद्री रास्ता जून के समझौते पर अमल होने तक बंद ही रहेगा। इसमें ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों को हटाना, तेल प्रतिबंधों को खत्म करना, फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल करना और सैन्य धमकियों को रोकना शामिल है।
विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि हालांकि यह जलमार्ग आम अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए इस पर पूरी पाबंदी है। राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी स्वीकार किया कि इस समुद्री नाकाबंदी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल Ali Abdollahi ने किसी भी नए अमेरिकी खतरे का कड़ा और विनाशकारी जवाब देने की धमकी दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने भी अमेरिका की तरफ से आने वाले नए प्रतिबंधों को गलत करार दिया है।
शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय असर
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि इस जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और उनकी सरकार नए आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent 25 अगस्त 2026 को इन नए उपायों की घोषणा करने वाले हैं। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने 20 अगस्त को 15 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल के परिवहन में मदद की थी। हालांकि, इन सब तनावों के बीच इस रास्ते से होने वाला शिपिंग ट्रैफिक युद्ध से पहले के स्तर से 90 प्रतिशत तक गिर चुका है और अब रोजाना औसतन केवल 12 जहाज ही यहां से गुजर रहे हैं।
इस बीच, इराक ने ईरान से विशेष अनुमति लेकर अपने तेल टैंकरों को इस जलमार्ग से भेजने का इंतजाम किया है और साथ ही तुर्की, सीरिया व जॉर्डन के रास्ते निर्यात के दूसरे विकल्पों पर भी काम कर रहा है। फ्रांस और सऊदी अरब जैसे देश भी ओमान के बंदरगाहों के जरिए व्यापार बढ़ाने और नए पाइपलाइन तथा रेल मार्ग विकसित करके इस रास्ते का विकल्प तलाशने में जुटे हुए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और कामगारों के लिए भी इस भू-राजनीतिक तनाव ने चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि इसका असर अंततः क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है।