Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही घटी, ओमान और ईरान के बीच नए समझौते पर बातचीत तेज.

होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की संख्या में इस हफ्ते भारी गिरावट देखी गई है। गुरुवार को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से सिर्फ आठ जहाज ही गुजर पाए। यह स्थिति तब बनी है जब 27 फरवरी 2026 से इस जलमार्ग को आधिकारिक तौर पर बंद घोषित किया गया है। पिछले सोमवार से गुरुवार के बीच केवल 33 जहाज ही गुजर सके, जो कि पिछले हफ्ते के 50 जहाजों के मुकाबले काफी कम है। संघर्ष शुरू होने से पहले यहाँ रोजाना 130 से 140 जहाज गुजरते थे।
समझौते की रूपरेखा और शुल्क का विवाद
ईरान और ओमान के बीच जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर एक समझौते पर बातचीत चल रही है। ईरान के अनुसार, यह समझौता अब अपने अंतिम चरण में है। इस प्रस्तावित डील में जहाजों के आने-जाने के रास्तों और ट्रांजिट शुल्क पर चर्चा की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान कार्गो की कुल कीमत का 5% से 7% तक शुल्क वसूलने की योजना बना रहा है, जबकि ओमान इस शुल्क को 3% के आसपास रखने के पक्ष में है। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते को लागू करने के लिए ईरान के शीर्ष नेतृत्व की अलग से मंजूरी जरूरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब यह जलमार्ग पहले की तरह एक खुला अंतरराष्ट्रीय मार्ग नहीं रहेगा।
अमेरिका का रुख और सुरक्षा हालात
अमेरिका ने 14 जुलाई को उन जहाजों के खिलाफ नाकेबंदी फिर से लागू कर दी थी जो ईरानी बंदरगाहों से आ रहे थे या जा रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही कोई समझौता हो जाएगा। वाशिंगटन का कहना है कि जैसे ही निर्बाध शिपिंग बहाल करने का समझौता होगा, वे अपनी नाकेबंदी हटा लेंगे। हालांकि, अमेरिका ने ईरान द्वारा ट्रांजिट शुल्क लगाए जाने का कड़ा विरोध किया है।
इलाके में सुरक्षा की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) ने जानकारी दी है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उनकी 15 जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें से तीन हमले इसी सप्ताह हुए हैं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए हैं। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण अब तक 49 व्यावसायिक जहाज अपना रास्ता बदलने को मजबूर हुए हैं और दो जहाज पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए हैं। ओमान और ईरान के बीच होने वाला यह समझौता आने वाले दिनों में समुद्री व्यापार की दिशा तय करेगा, जिसका सीधा असर खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों और व्यापार पर पड़ रहा है।