Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के तनाव से हार्मोन जलडमरूमध्य में थमी जहाजों की आवाजाही, UAE ने ठहराया तेहरान को जिम्मेदार.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। रविवार, 16 अगस्त 2026 को इस रणनीतिक जलमार्ग से एक भी जहाज नहीं गुजरा, जिससे समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले हफ्ते जहां इस रास्ते से 31 जहाज गुजरे थे, वहीं इस रविवार को यह आंकड़ा गिरकर लगभग शून्य पर पहुंच गया। इस अचानक आए ठहराव से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
जहाजों पर हमलों के बाद बिगड़े हालात
यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC के तीन जहाजों पर हमले किए गए। इसके अलावा यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस UKMTO की एक रिपोर्ट में भी एक बल्क कैरियर पर प्रोजेक्टाइल से हमले की बात सामने आई थी। इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद शिपिंग कंपनियों और जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों और अन्य कामगारों के लिए भी यह स्थिति काफी तनावपूर्ण होती जा रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
ईरान और अमेरिका का रुख
दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपना नौसैनिक नाकाबंदी और सैन्य मौजूदगी खत्म नहीं करता, तब तक नौवहन सामान्य नहीं होगा। तेहरान सरकार अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अपने लिए सीधा खतरा मानती है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने ओमान के साथ एक नए नेविगेशन मैप को लेकर तकनीकी समझौते की पुष्टि की है, लेकिन विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कर दिया है कि इससे Strait of Hormuz तुरंत नहीं खुलेगा। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने भी अपनी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने और आर्थिक दबाव को और बढ़ाने का पूरा इरादा जताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पिछले संघर्षों के लिए मुआवजे की मांग की है।
UAE की कड़ी प्रतिक्रिया
संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन हालिया टैंकर हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। इस आरोप-प्रत्यारोप के खेल से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता काफी बढ़ गई है। खाड़ी देशों में सफर करने वाले यात्रियों और वहां बसे प्रवासियों के मन में यह डर बैठ गया है कि अगर यह तनाव और ज्यादा बढ़ता है, तो इससे यात्रा और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनातनी बनी हुई है और समुद्री रास्ते पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है.