सूडान में भयंकर जंग, कॉरडोफन इलाके से 2 लाख लोग हुए बेघर, संयुक्त राष्ट्र ने बुलाई बैठक.

सूडान में चल रहे भीषण संघर्ष के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी IOM के अनुसार, पिछले साल के अंत यानी 2025 से लेकर अब तक कॉरडोफन क्षेत्र में कम से कम 200,000 लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हो चुके हैं। इस खूनी संघर्ष की शुरुआत अप्रैल 2023 में हुई थी, जिसके बाद से देश में तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आम जनता इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत चुका रही है और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर है।
युद्ध के आंकड़े और बढ़ता मानवीय संकट
सूडान में जारी इस गृहयुद्ध की वजह से अप्रैल 2026 तक लगभग 59,000 लोगों की जान जाने की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि जमीन पर हालात को देखते हुए वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है। इस जंग ने देश की करीब 14 million यानी 1 करोड़ 40 लाख आबादी को उनके घरों से बेघर कर दिया है। इनमें से लगभग 12 million लोग अपने ही देश के भीतर अलग-अलग जगहों पर शरणार्थी बनने को मजबूर हैं, जबकि दो लाख से ज्यादा लोग जान बचाकर चाड, दक्षिण सूडान और मिस्र जैसे पड़ोसी देशों में चले गए हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप IOM की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
अल ओबेइद में बुनियादी ढांचे पर हमले
हाल के दिनों में सूडान के कई इलाकों में हिंसा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अल ओबेइद शहर के बिजली ढांचे को निशाना बनाकर लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से पूरे इलाके में बिजली और अन्य जरूरी सेवाएं ठप पड़ी हैं। हाल ही में 20 अगस्त 2026 को रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी RSF ने अल ओबेइद के दक्षिण-पश्चिम में स्थित गांवों पर हमले किए। इन हमलों में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई और एक हजार से ज्यादा आम नागरिकों को अपनी जान बचाने के लिए गांव छोड़कर भागना पड़ा। इसके अलावा, हिंसा और फैल रहे कोलरा यानी हैजा के प्रकोप की वजह से अल मजरूब इलाके में चल रहे राहत और बचाव कार्यों को भी पूरी तरह से रोकना पड़ा है। इस पूरी स्थिति पर नजर रखने वाली संस्थाओं की रिपोर्ट आप ReliefWeb रिपोर्ट में देख सकते हैं।
नूबा पर्वत में समझौते का उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र की बैठक
हिंसा का दायरा सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी तनाव गहराता जा रहा है। बीते 22 अगस्त 2026 को नूबा पर्वत क्षेत्र में तनाव उस समय बहुत बढ़ गया जब ओटोरो जनजाति ने सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ यानी SPLM-N पर संघर्ष विराम तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया। आरोप के मुताबिक, संगठन ने कौडा शहर पर भारी तोपखाने से गोले दागे। हैरानी की बात यह है कि यह हमला SPLM-N के नेता अब्दुलअजीज अल-हिल्लू द्वारा युद्धविराम की घोषणा करने के २४ घंटे के भीतर ही हो गया। देश भर में अब तक 8.6 million लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं। आम नागरिकों की सुरक्षा और युद्ध के कारण पैदा हुए डरावने हालातों पर चर्चा करने के लिए अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आगामी 24 अगस्त 2026 को एक खुली बैठक करने जा रही है।