सूडान के अल ओबेद में पानी का भयंकर संकट, युद्ध के कारण बच्चों और परिवारों का जीना हुआ मुश्किल.

सूडान में जारी भीषण युद्ध के बीच एल ओबेद (El Obeid) शहर में शरणार्थी शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों के सामने पानी का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। अल जजीरा के पत्रकार अलमिग्दद अल्रुहैद ने 26 अगस्त 2026 को मौके से रिपोर्टिंग करते हुए बताया कि अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने शहर के मुख्य पानी के स्रोतों को जानबूझकर निशाना बनाया है। जून से अगस्त 2026 के बीच हुए भारी ड्रोन हमलों ने स्थानीय बाजारों और पानी के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह तबाह कर दिया है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
बच्चों और परिवारों पर मंडरा रहा है भुखमरी और बीमारी का खतरा
सेव द चिल्ड्रेन (Save the Children) संस्था के सूडान में डिप्टी कंट्री डायरेक्टर फ्रांसेस्को लैनिनो ने 25 अगस्त 2026 को जानकारी दी थी कि एल ओबेद शहर अब मानवीय आपदा के बिल्कुल करीब पहुंच गया है। यहाँ आने वाले नए परिवारों को खाने की भारी कमी और साफ पानी न मिलने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। केवल साल 2026 के पहले छह महीनों में ही लगभग 39,000 बच्चे भागकर एल ओबेद पहुंचे हैं। शहर के मुख्य बिजली ट्रांसफार्मर पर हुए ड्रोन हमलों ने इस संकट को और ज्यादा गंभीर बना दिया है, जिसके कारण पूरे इलाके में बिजली गुल है और पानी सप्लाई करने वाले पंप भी पूरी तरह बंद पड़े हैं। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी ReliefWeb की रिपोर्ट में दी गई है।
एक लीटर पानी में दिन गुजारने को मजबूर हुए लोग
मेकर्स सैंस फ्रंटियर्स (Médecins Sans Frontières) यानी डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर जैसे चिकित्सा संगठनों के मुताबिक हालात इतने भयानक हैं कि कई परिवार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन केवल एक लीटर पानी या उससे भी कम पर जिंदा रहने को मजबूर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नियम के अनुसार किसी भी आपदा या संकट के समय एक व्यक्ति को कम से कम 15 लीटर पानी मिलना जरूरी होता है, लेकिन यहाँ लोग उससे बहुत कम पानी पा रहे हैं। उत्तर कोर्डोफ़ान ह्यूमैनिटेरियन एड कमीशन ने 'सुखिया' नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत मोबाइल वाटर टैंकर भेजे जा रहे हैं और नए कुएं खोदे जा रहे हैं ताकि पानी की कमी को थोड़ा बहुत पूरा किया जा सके, लेकिन लगातार हो रहे हमलों के कारण यह बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं बचा है।
बीमारियों के फैलने का बना हुआ है बड़ा खतरा
संयुक्त राष्ट्र (UN) और तमाम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार इन हमलों पर नजर बनाए हुए हैं और विस्थापित लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं। साफ पानी न मिलने और दूषित माहौल के कारण लोगों में हैजा (Cholera) जैसी खतरनाक बीमारियों के फैलने का भारी खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध में प्लान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई है कि बच्चों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी तबाही से कम नहीं है, जिसके बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb की इस रिपोर्ट में पढ़ी जा सकती है। स्थानीय अधिकारी और राहत दल हालात को संभालने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन युद्ध के बीच राहत पहुँचाना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है।