FT Probe: सूडान की जंग में सोने की तस्करी का बड़ा खुलासा, यूएई तक पहुँच रहा है करोड़ों का सोना

Praggya Singh sabal11 August 20263 min read91 viewsUAE
FT Probe: सूडान की जंग में सोने की तस्करी का बड़ा खुलासा, यूएई तक पहुँच रहा है करोड़ों का सोना

सूडान के गृहयुद्ध की शुरुआत के साथ ही सोने की अवैध तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक हालिया जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2023 में जब देश में संघर्ष शुरू हुआ, तब रैपिड सपोर्ट फोर्सेस यानी आरएसएफ ने सरकारी रिफाइनरी और बैंकों से लगभग 1.5 टन सोना चुरा लिया था। इस चोरी किए गए सोने की कुल कीमत लगभग 100 मिलियन डॉलर यानी करीब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है, जो सीधे तौर पर इस खूनी संघर्ष को और ज्यादा बढ़ावा दे रही है।

कैसे होती थी सोने की तस्करी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सूडान से चुराए गए इस सोने को पहले चाड और दक्षिण सूडान के रास्ते से तस्करी करके बाहर निकाला गया। इसके बाद इसे दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा से विमानों के जरिए संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई भेजा गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सोने को ले जाने के लिए कथित तौर पर अमीराती कार्गो विमानों का इस्तेमाल किया गया था। दुनिया भर में दुबई को सोने का एक बहुत बड़ा बाजार माना जाता है, जहां सूडान से आने वाले इस अवैध सोने की बड़ी खेप लगातार पहुंच रही है, जिससे सूडान के युद्धरत गुटों को आर्थिक मदद मिल रही है।

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संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में अकेले आरएसएफ ने सोने के व्यापार से अनुमानित 860 मिलियन डॉलर की कमाई की है। वहीं, साल 2025 के आखिर में सूडान सरकार के एक अधिकारी ने आरोप लगाया था कि आरएसएफ ने साल 2024 से लेकर साल 2025 की शुरुआत के बीच 850 मिलियन डॉलर से ज्यादा मूल्य के सोने की तस्करी यूएई में की है। हालांकि, आरएसएफ इन सभी आरोपों से लगातार इनकार करती आई है। दूसरी तरफ, यूएई सरकार का कहना है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने के लिए बनाए गए सभी नियमों का पूरी सख्ती से पालन करती है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों का अनुमान है कि सूडान का लगभग 50 से 70 प्रतिशत सोना तस्करी के जरिए देश से बाहर भेजा जाता है, जिसका मुख्य ठिकाना यूएई ही बनता है। सूडान की सेना और आरएसएफ दोनों ही देश की खदानों और व्यापारिक मार्गों पर कब्जा करने के लिए आपस में लड़ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कड़े कदम

सूडान के इस संघर्ष को हवा देने वाले 'कॉन्फ्लिक्ट गोल्ड' यानी युद्ध में इस्तेमाल होने वाले सोने के खिलाफ अब वैश्विक स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। जुलाई 2026 में यूरोपीय संघ ने सूडान से आने वाले सभी प्रकार के सोने के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, सोने के खनन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी रसायनों के निर्यात पर भी रोक लगा दी गई है, ठीक वैसा ही कदम ब्रिटेन ने भी अपने शुरुआती प्रतिबंधों के दौरान उठाया था। 'द सेंट्री' संस्था से जुड़े विशेषज्ञ साशा लेझनेव का कहना है कि हर साल करोड़ों डॉलर का संघर्ष वाला सोना यूएई और दुनिया के दूसरे बाजारों तक पहुंच रहा है, जिससे सूडान के मैदानों में लड़ाई जारी रखने के लिए पैसे मिल रहे हैं।

अगस्त 2026 की ताजा रिपोर्टों में इस बात का खुलासा हुआ है कि सोने को सफेद करने का खेल बहुत ही शातिर तरीके से खेला जा रहा है। सूडान से तस्करी कर लाए गए कच्चे सोने को पहले दक्षिण सूडान में दोबारा पिघलाया जाता है और उसके सांचे बदले जाते हैं। इसके बाद उस पर नकली कागजात और दस्तावेज तैयार किए जाते हैं और फिर उसे जुबा एयरपोर्ट से सीधे दुबई के लिए भेज दिया जाता है। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और नियमों के बावजूद, अगस्त 2026 में सूडान के कच्चे सोने के दाम अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोने का यह व्यापार आज भी सूडान के लिए बहुत जरूरी बना हुआ है, भले ही इसके कारण देश के अंदर खून-खराबा और ज्यादा बढ़ रहा हो।

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