UAE के तेल टैंकर पर ईरान का मिसाइल हमला, सीरिया ने की कड़ी निंदा और जताया समर्थन.

सीरिया की सरकार ने 9 अगस्त 2026 को यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात के एक तेल टैंकर पर हुए ईरानी मिसाइल हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह हमला फारस की खाड़ी के पास स्थित महत्वपूर्ण जलमार्ग Strait of Hormuz से गुजरते समय हुआ था, जिसे अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC द्वारा संचालित किया जा रहा था। इस घटना के सामने आने के बाद से पूरे खाड़ी देशों में चिंता का माहौल है और सभी देश समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं। आम लोगों और वहां काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी इस तनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
घटना की पूरी जानकारी और समय
यह खतरनाक हमला 8 अगस्त 2026 की सुबह के शुरुआती घंटों में हुआ था जब टैंकर पानी के रास्ते आगे बढ़ रहा था। गनीमत यह रही कि इस बड़े हमले में जहाज पर मौजूद किसी भी कर्मचारी के हताहत होने या घायल होने की कोई खबर सामने नहीं आई और स्थिति को समय रहते काबू में कर लिया गया। सीरिया के विदेश मंत्रालय और expatriates मामलों के मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यूएई के प्रति अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा को निशाना बनाने वाले किसी भी तरह के कृत्यों को सिरे से खारिज किया है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की रक्षा पर जोर दिया है।
फरवरी 2026 से अब तक ADNOC के जहाजों पर 16 हमले
यह अकेली ऐसी घटना नहीं है बल्कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के संघर्ष की शुरुआत के बाद से ADNOC के जहाजों पर यह 16वां हमला है। इससे पहले हुए हमलों में एक क्रू मेंबर की जान जा चुकी है और करीब 20 लोग घायल हो चुके हैं। इन लगातार हो रही घटनाओं की वजह से खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य देशों के प्रवासी मजदूर भी डरे हुए हैं क्योंकि इस रास्ते से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ता है। यूएई सरकार ने इस हमले को एक शत्रुतापूर्ण ईरानी हमला करार दिया है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव UNSC Resolution 2817 का खुला उल्लंघन बताया है, जो नेविगेशन की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स का पक्ष
यूएई ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC पर Strait of Hormuz का इस्तेमाल राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने के लिए करने का गंभीर आरोप लगाया है। कतर, सऊदी अरब, यमन और जॉर्डन जैसे कई अन्य देशों ने भी इस हमले की खुलकर निंदा की है। दूसरी ओर, ईरान के IRGC का कहना है कि जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने की बात तभी संभव होगी जब वाशिंगटन यानी अमेरिका कुछ खास शर्तों को मानेगा। इनमें अमेरिका की तरफ से धमकियां बंद करना, प्रतिबंधों में ढील देना और क्षेत्र से अमेरिकी सेना को पूरी तरह वापस बुलाना शामिल है। इन सख्त शर्तों और हमलों के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर यातायात में भारी गिरावट दर्ज की गई है।