अमेरिका और ईरान वार्ता पर बड़ा अपडेट, तेहरान ने खारिज किए नए मध्यस्थ, पाकिस्तान और कतर बने मुख्य जरिया.

तेहरान ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में किसी भी नए मध्यस्थ की मध्यस्थता को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। Foreign Ministry Spokesperson Esmaeil Baqaei ने इस बात साफ किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ही मुख्य मध्यस्थ बना हुआ है और उसे कतर का पूरा समर्थन मिल रहा है। यूरोपीय देशों की तरफ से हाल ही में जो अच्छे कार्यालय यानी मदद के ऑफर आए थे, उन्हें नए राजनयिक चैनल की नियुक्ति नहीं माना जा रहा है। यह बड़ा बयान उस समय सामने आया जब 18 June को साइन हुए समझौता ज्ञापन यानी MoU की 60-day समय सीमा समाप्त हो गई है। तेहरान का मानना है कि औपचारिक चर्चा शुरू होने से पहले अमेरिकी पक्षों की तरफ से नियमों का उल्लंघन किया गया था, जिसकी वजह से अब इस समझौते का कोई मतलब नहीं रह गया है।
जून के समझौते को आगे बढ़ाने से ईरान का साफ इनकार
ईरान ने जून के इस ज्ञापन को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी तरह की बातचीत से बिल्कुल मना कर दिया है। सरकार का यह साफ रुख रहा है कि उनके नीतिगत फैसले किसी भी तरह की समय सीमा या अल्टीमेटम के दबाव में नहीं लिए जाएंगे। जैसे ही यह तय समय सीमा पूरी हुई, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के Brig. General Yadollah Javani ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में कुछ बड़े रणनीतिक सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही ईरान अपनी सैन्य स्थिति को रक्षात्मक से बदलकर आक्रामक भी कर सकता है। अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने और परमाणु मुद्दों पर चल रही बातचीत इस समय रुकी हुई है, लेकिन इसके बावजूद ईरान ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अलग ट्रांजिट समझौते पर काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि औपचारिक शांति वार्ता फिर से शुरू हो गई है।